25 दिसंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 25 दिसंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 25 दिसंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (06:54 तक), नक्षत्र आश्लेषा (11:55 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 17:20 पर है। राहुकाल 14:43 से 16:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:52 – 17:20
रात 06:53 तक
तिथि
पंचमी, 06:25 तक
नक्षत्र
आश्लेषा, 11:55 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 06:54 तक
कृष्ण पंचमी 06:25, 26 दिस॰ तक
कृष्ण षष्ठी 05:29, 27 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 11:56, 26 दिस॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 18:26 तक
प्रीति 16:40, 26 दिस॰ तक
करण
बालव 06:54 तक
कौलव 18:43 तक
तैतिल 06:25, 26 दिस॰ तक
गर 18:00, 26 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 11:55 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
17:20
चंद्रोदय
21:34
चंद्रास्त
09:45
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
14:43 – 16:01
यमगंड
09:29 – 10:47
गुलिक काल
12:06 – 13:24

25 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:52 – 08:11टालें
उद्वेग08:11 – 09:29टालें
चर09:29 – 10:47सामान्य
लाभ10:47 – 12:06शुभ
अमृत12:06 – 13:24शुभ
काल13:24 – 14:43टालें
शुभ14:43 – 16:01शुभ
रोग16:01 – 17:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:20 – 19:01टालें
लाभ19:01 – 20:43शुभ
उद्वेग20:43 – 22:24टालें
शुभ22:24 – 00:06शुभ
अमृत00:06 – 01:48शुभ
चर01:48 – 03:29सामान्य
रोग03:29 – 05:11टालें
काल05:11 – 06:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:5207:44दिन
सूर्य07:4408:37दिन
शुक्र08:3709:29दिन
बुध09:2910:21दिन
चंद्र10:2111:14दिन
शनि11:1412:06दिन
गुरु12:0612:58दिन
मंगल12:5813:50दिन
सूर्य13:5014:43दिन
शुक्र14:4315:35दिन
बुध15:3516:27दिन
चंद्र16:2717:20दिन
शनि17:2018:27रात
गुरु18:2719:35रात
मंगल19:3520:43रात
सूर्य20:4321:51रात
शुक्र21:5122:58रात
बुध22:5800:06रात
चंद्र00:0601:14रात
शनि01:1402:22रात
गुरु02:2203:29रात
मंगल03:2904:37रात
सूर्य04:3705:45रात
शुक्र05:4506:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2759° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।