29 दिसंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 29 दिसंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 29 दिसंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (00:16, 30 दिस॰ तक), नक्षत्र हस्त (09:32 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 17:22 पर है। राहुकाल 09:31 से 10:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 17:22
रात 06:54 तक
तिथि
नवमी, 00:16 तक
दशमी
नक्षत्र
हस्त, 09:32 तक
चित्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण नवमी 00:16, 30 दिस॰ तक
कृष्ण दशमी 21:51, 30 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:32 तक
चित्रा 08:00, 30 दिस॰ तक
योग
शोभन 09:22 तक
अतिगंडअशुभ 06:21, 30 दिस॰ तक
सुकर्मा 03:05, 31 दिस॰ तक
करण
तैतिल 13:22 तक
गर 00:16, 30 दिस॰ तक
वणिज 11:06, 30 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 20:48 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
00:33
चंद्रास्त
12:12
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
09:31 – 10:49
यमगंड
13:26 – 14:45
गुलिक काल
06:54 – 08:12

29 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:54 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:31शुभ
रोग09:31 – 10:49टालें
उद्वेग10:49 – 12:08टालें
चर12:08 – 13:26सामान्य
लाभ13:26 – 14:45शुभ
अमृत14:45 – 16:03शुभ
काल16:03 – 17:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:22 – 19:03शुभ
उद्वेग19:03 – 20:45टालें
शुभ20:45 – 22:26शुभ
अमृत22:26 – 00:08शुभ
चर00:08 – 01:49सामान्य
रोग01:49 – 03:31टालें
काल03:31 – 05:12टालें
लाभ05:12 – 06:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5407:46दिन
गुरु07:4608:38दिन
मंगल08:3809:31दिन
सूर्य09:3110:23दिन
शुक्र10:2311:15दिन
बुध11:1512:08दिन
चंद्र12:0813:00दिन
शनि13:0013:52दिन
गुरु13:5214:45दिन
मंगल14:4515:37दिन
सूर्य15:3716:30दिन
शुक्र16:3017:22दिन
बुध17:2218:30रात
चंद्र18:3019:37रात
शनि19:3720:45रात
गुरु20:4521:53रात
मंगल21:5323:00रात
सूर्य23:0000:08रात
शुक्र00:0801:16रात
बुध01:1602:23रात
चंद्र02:2303:31रात
शनि03:3104:39रात
गुरु04:3905:46रात
मंगल05:4606:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2760° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।