30 जनवरी 2025 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 30 जनवरी 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 30 जनवरी 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (21:41 तक), नक्षत्र श्रवण (12:45 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 20:34 पर है। राहुकाल 15:18 से 17:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 20:34
रात 06:32 तक
तिथि
प्रतिपदा, 21:41 तक
द्वितीया
नक्षत्र
श्रवण, 12:45 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जनवरी 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 21:41 तक
शुक्ल द्वितीया 19:29, 31 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 12:45 तक
धनिष्ठा 11:20, 31 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 00:03, 31 जन॰ तक
वरीयान 21:02, 31 जन॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 10:41 तक
बव 21:41 तक
बालव 08:36, 31 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 00:05, 31 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
20:34
चंद्रोदय
06:48
चंद्रास्त
21:17
दिनमान
14h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
13:04 – 14:01

अशुभ समय

राहुकाल
15:18 – 17:03
यमगंड
06:31 – 08:16
गुलिक काल
10:02 – 11:47

30 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:31 – 08:16शुभ
रोग08:16 – 10:02टालें
उद्वेग10:02 – 11:47टालें
चर11:47 – 13:33सामान्य
लाभ13:33 – 15:18शुभ
अमृत15:18 – 17:03शुभ
काल17:03 – 18:49टालें
शुभ18:49 – 20:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत20:34 – 21:49शुभ
चर21:49 – 23:04सामान्य
रोग23:04 – 00:18टालें
काल00:18 – 01:33टालें
लाभ01:33 – 02:48शुभ
उद्वेग02:48 – 04:03टालें
शुभ04:03 – 05:17शुभ
अमृत05:17 – 06:32शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3107:41दिन
मंगल07:4108:51दिन
सूर्य08:5110:02दिन
शुक्र10:0211:12दिन
बुध11:1212:22दिन
चंद्र12:2213:33दिन
शनि13:3314:43दिन
गुरु14:4315:53दिन
मंगल15:5317:03दिन
सूर्य17:0318:14दिन
शुक्र18:1419:24दिन
बुध19:2420:34दिन
चंद्र20:3421:24रात
शनि21:2422:14रात
गुरु22:1423:04रात
मंगल23:0423:54रात
सूर्य23:5400:43रात
शुक्र00:4301:33रात
बुध01:3302:23रात
चंद्र02:2303:13रात
शनि03:1304:03रात
गुरु04:0304:52रात
मंगल04:5205:42रात
सूर्य05:4206:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2074° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।