3 फ़रवरी 2025 को मेलबर्न का पंचांग

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (12:23 तक), नक्षत्र रेवती (04:46, 4 फ़र॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 20:31 पर है। राहुकाल 08:20 से 10:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 20:31
रात 06:37 तक
तिथि
पंचमी, 12:23 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रेवती, 04:46 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 12:23 तक
शुक्ल षष्ठी 10:07, 4 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 04:46, 4 फ़र॰ तक
अश्विनी 03:19, 5 फ़र॰ तक
योग
सिद्ध 11:35 तक
साध्य 08:32, 4 फ़र॰ तक
करण
बालव 12:23 तक
कौलव 23:14 तक
तैतिल 10:07, 4 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मीन 04:46, 4 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
20:31
चंद्रोदय
11:37
चंद्रास्त
23:06
दिनमान
13h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:15 – 05:55
अभिजीत मुहूर्त
13:05 – 14:01

अशुभ समय

राहुकाल
08:20 – 10:04
यमगंड
11:49 – 13:33
गुलिक काल
15:18 – 17:02

3 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:35 – 08:20शुभ
काल08:20 – 10:04टालें
शुभ10:04 – 11:49शुभ
रोग11:49 – 13:33टालें
उद्वेग13:33 – 15:18टालें
चर15:18 – 17:02सामान्य
लाभ17:02 – 18:46शुभ
अमृत18:46 – 20:31शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर20:31 – 21:47सामान्य
रोग21:47 – 23:02टालें
काल23:02 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 01:34शुभ
उद्वेग01:34 – 02:49टालें
शुभ02:49 – 04:05शुभ
अमृत04:05 – 05:21शुभ
चर05:21 – 06:37सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3507:45दिन
शनि07:4508:55दिन
गुरु08:5510:04दिन
मंगल10:0411:14दिन
सूर्य11:1412:24दिन
शुक्र12:2413:33दिन
बुध13:3314:43दिन
चंद्र14:4315:52दिन
शनि15:5217:02दिन
गुरु17:0218:12दिन
मंगल18:1219:21दिन
सूर्य19:2120:31दिन
शुक्र20:3121:21रात
बुध21:2122:12रात
चंद्र22:1223:02रात
शनि23:0223:53रात
गुरु23:5300:43रात
मंगल00:4301:34रात
सूर्य01:3402:24रात
शुक्र02:2403:15रात
बुध03:1504:05रात
चंद्र04:0504:56रात
शनि04:5605:46रात
गुरु05:4606:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2076° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।