7 मार्च 2025 को मेलबर्न का पंचांग

शुक्रवार, 7 मार्च 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

शुक्रवार, 7 मार्च 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (14:49 तक), नक्षत्र मृगशिरा (05:02, 8 मार्च तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:10 पर और सूर्यास्त 19:51 पर है। राहुकाल 11:55 से 13:30 तक है।

दिन और रात
दिन 07:10 – 19:51
रात 07:11 तक
तिथि
अष्टमी, 14:49 तक
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 05:02 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 मार्च 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 14:49 तक
शुक्ल नवमी 13:47, 8 मार्च तक
नक्षत्र
मृगशिरा 05:02, 8 मार्च तक
आर्द्रा 04:58, 9 मार्च तक
योग
प्रीति 23:44 तक
आयुष्मान 21:54, 8 मार्च तक
करण
बव 14:49 तक
बालव 02:14, 8 मार्च तक
कौलव 13:47, 8 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 17:15 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:10
सूर्यास्त
19:51
चंद्रोदय
15:29
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:40 – 06:25
अभिजीत मुहूर्त
13:05 – 13:56

अशुभ समय

राहुकाल
11:55 – 13:30
यमगंड
16:41 – 18:16
गुलिक काल
08:45 – 10:20

7 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:10 – 08:45सामान्य
लाभ08:45 – 10:20शुभ
अमृत10:20 – 11:55शुभ
काल11:55 – 13:30टालें
शुभ13:30 – 15:05शुभ
रोग15:05 – 16:41टालें
उद्वेग16:41 – 18:16टालें
चर18:16 – 19:51सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:51 – 21:16टालें
काल21:16 – 22:41टालें
लाभ22:41 – 00:06शुभ
उद्वेग00:06 – 01:31टालें
शुभ01:31 – 02:56शुभ
अमृत02:56 – 04:21शुभ
चर04:21 – 05:46सामान्य
रोग05:46 – 07:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1008:13दिन
बुध08:1309:17दिन
चंद्र09:1710:20दिन
शनि10:2011:24दिन
गुरु11:2412:27दिन
मंगल12:2713:30दिन
सूर्य13:3014:34दिन
शुक्र14:3415:37दिन
बुध15:3716:41दिन
चंद्र16:4117:44दिन
शनि17:4418:47दिन
गुरु18:4719:51दिन
मंगल19:5120:47रात
सूर्य20:4721:44रात
शुक्र21:4422:41रात
बुध22:4123:37रात
चंद्र23:3700:34रात
शनि00:3401:31रात
गुरु01:3102:28रात
मंगल02:2803:24रात
सूर्य03:2404:21रात
शुक्र04:2105:18रात
बुध05:1806:14रात
चंद्र06:1407:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
15 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
2 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2088° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।