9 मार्च 2025 को मेलबर्न का पंचांग

रविवार, 9 मार्च 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

रविवार, 9 मार्च 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (13:15 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (05:25, 10 मार्च तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 19:48 पर है। राहुकाल 18:13 से 19:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 19:48
रात 07:13 तक
तिथि
दशमी, 13:15 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 05:25 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मार्च 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 13:15 तक
शुक्ल एकादशी 13:15, 10 मार्च तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 05:25, 10 मार्च तक
पुष्य 06:21, 11 मार्च तक
योग
सौभाग्य 20:28 तक
शोभन 19:26, 10 मार्च तक
करण
गर 13:15 तक
वणिज 01:11, 10 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 13:15, 10 मार्च तक
चंद्र राशि
मिथुन 23:15 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
19:48
चंद्रोदय
17:17
चंद्रास्त
01:31
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:41 – 06:26
अभिजीत मुहूर्त
13:05 – 13:55

अशुभ समय

राहुकाल
18:13 – 19:48
यमगंड
13:30 – 15:04
गुलिक काल
16:39 – 18:13

9 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:12 – 08:46टालें
चर08:46 – 10:21सामान्य
लाभ10:21 – 11:55शुभ
अमृत11:55 – 13:30शुभ
काल13:30 – 15:04टालें
शुभ15:04 – 16:39शुभ
रोग16:39 – 18:13टालें
उद्वेग18:13 – 19:48टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:48 – 21:13शुभ
अमृत21:13 – 22:39शुभ
चर22:39 – 00:05सामान्य
रोग00:05 – 01:30टालें
काल01:30 – 02:56टालें
लाभ02:56 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:47टालें
शुभ05:47 – 07:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1208:15दिन
शुक्र08:1509:18दिन
बुध09:1810:21दिन
चंद्र10:2111:24दिन
शनि11:2412:27दिन
गुरु12:2713:30दिन
मंगल13:3014:33दिन
सूर्य14:3315:36दिन
शुक्र15:3616:39दिन
बुध16:3917:42दिन
चंद्र17:4218:45दिन
शनि18:4519:48दिन
गुरु19:4820:45रात
मंगल20:4521:42रात
सूर्य21:4222:39रात
शुक्र22:3923:36रात
बुध23:3600:33रात
चंद्र00:3301:30रात
शनि01:3002:27रात
गुरु02:2703:25रात
मंगल03:2504:22रात
सूर्य04:2205:19रात
शुक्र05:1906:16रात
बुध06:1607:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
15 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
2 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2089° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।