2 अप्रैल 2025 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 2 अप्रैल 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 2 अप्रैल 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (08:02 तक), नक्षत्र कृत्तिका (14:19 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:34 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 13:23 से 14:50 तक है।

दिन और रात
दिन 07:34 – 19:12
रात 07:35 तक
तिथि
पंचमी, 05:20 तक
षष्ठी
नक्षत्र
कृत्तिका, 14:19 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 08:02 तक
शुक्ल पंचमी 05:20, 3 अप्रैल तक
शुक्ल षष्ठी 03:11, 4 अप्रैल तक
नक्षत्र
रोहिणी 12:32, 3 अप्रैल तक
योग
प्रीति 11:37 तक
आयुष्मान 08:19, 3 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:02 तक
बव 18:37 तक
बालव 05:20, 3 अप्रैल तक
कौलव 16:11, 3 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:34
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
12:04
चंद्रास्त
21:27
दिनमान
11h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:55 – 06:45
अभिजीत मुहूर्त
13:00 – 13:46 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:23 – 14:50
यमगंड
09:01 – 10:29
गुलिक काल
11:56 – 13:23

2 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:34 – 09:01शुभ
अमृत09:01 – 10:29शुभ
काल10:29 – 11:56टालें
शुभ11:56 – 13:23शुभ
रोग13:23 – 14:50टालें
उद्वेग14:50 – 16:17टालें
चर16:17 – 17:44सामान्य
लाभ17:44 – 19:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:12 – 20:45टालें
शुभ20:45 – 22:18शुभ
अमृत22:18 – 23:50शुभ
चर23:50 – 01:23सामान्य
रोग01:23 – 02:56टालें
काल02:56 – 04:29टालें
लाभ04:29 – 06:02शुभ
उद्वेग06:02 – 07:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:3408:32दिन
चंद्र08:3209:31दिन
शनि09:3110:29दिन
गुरु10:2911:27दिन
मंगल11:2712:25दिन
सूर्य12:2513:23दिन
शुक्र13:2314:21दिन
बुध14:2115:19दिन
चंद्र15:1916:17दिन
शनि16:1717:15दिन
गुरु17:1518:13दिन
मंगल18:1319:12दिन
सूर्य19:1220:14रात
शुक्र20:1421:16रात
बुध21:1622:18रात
चंद्र22:1823:19रात
शनि23:1900:21रात
गुरु00:2101:23रात
मंगल01:2302:25रात
सूर्य02:2503:27रात
शुक्र03:2704:29रात
बुध04:2905:31रात
चंद्र05:3106:33रात
शनि06:3307:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2098° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।