27 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (11:35 तक), नक्षत्र मूल (18:57 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:19 पर और सूर्यास्त 19:49 पर है। राहुकाल 08:00 से 09:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:19 – 19:49
रात 06:18 तक
तिथि
पंचमी, 11:35 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 18:57 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 11:35 तक
शुक्ल षष्ठी 13:30, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 18:57 तक
पूर्वाषाढ़ा 21:15, 28 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 12:56 तक
सुकर्मा 13:20, 28 अक्टू॰ तक
करण
बालव 11:35 तक
कौलव 00:36, 28 अक्टू॰ तक
तैतिल 13:30, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:19
सूर्यास्त
19:49
चंद्रोदय
09:32
चंद्रास्त
00:30
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
08:00 – 09:41
यमगंड
11:23 – 13:04
गुलिक काल
14:45 – 16:26

27 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:19 – 08:00शुभ
काल08:00 – 09:41टालें
शुभ09:41 – 11:23शुभ
रोग11:23 – 13:04टालें
उद्वेग13:04 – 14:45टालें
चर14:45 – 16:26सामान्य
लाभ16:26 – 18:08शुभ
अमृत18:08 – 19:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:49 – 21:08सामान्य
रोग21:08 – 22:26टालें
काल22:26 – 23:45टालें
लाभ23:45 – 01:03शुभ
उद्वेग01:03 – 02:22टालें
शुभ02:22 – 03:40शुभ
अमृत03:40 – 04:59शुभ
चर04:59 – 06:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1907:26दिन
शनि07:2608:34दिन
गुरु08:3409:41दिन
मंगल09:4110:49दिन
सूर्य10:4911:56दिन
शुक्र11:5613:04दिन
बुध13:0414:11दिन
चंद्र14:1115:19दिन
शनि15:1916:26दिन
गुरु16:2617:34दिन
मंगल17:3418:41दिन
सूर्य18:4119:49दिन
शुक्र19:4920:41रात
बुध20:4121:34रात
चंद्र21:3422:26रात
शनि22:2623:18रात
गुरु23:1800:11रात
मंगल00:1101:03रात
सूर्य01:0301:56रात
शुक्र01:5602:48रात
बुध02:4803:40रात
चंद्र03:4004:33रात
शनि04:3305:25रात
गुरु05:2506:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।