26 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

रविवार, 26 अक्टूबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

रविवार, 26 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (09:18 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (16:16 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 19:48 पर है। राहुकाल 18:07 से 19:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 19:48
रात 06:19 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 16:16 तक
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 09:18 तक
शुक्ल पंचमी 11:35, 27 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 18:57, 27 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 12:15 तक
अतिगंडअशुभ 12:56, 27 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:18 तक
बव 22:29 तक
बालव 11:35, 27 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
19:48
चंद्रोदय
08:40
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:56 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
18:07 – 19:48
यमगंड
13:04 – 14:45
गुलिक काल
16:26 – 18:07

26 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:20 – 08:01टालें
चर08:01 – 09:42सामान्य
लाभ09:42 – 11:23शुभ
अमृत11:23 – 13:04शुभ
काल13:04 – 14:45टालें
शुभ14:45 – 16:26शुभ
रोग16:26 – 18:07टालें
उद्वेग18:07 – 19:48टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:48 – 21:07शुभ
अमृत21:07 – 22:26शुभ
चर22:26 – 23:44सामान्य
रोग23:44 – 01:03टालें
काल01:03 – 02:22टालें
लाभ02:22 – 03:41शुभ
उद्वेग03:41 – 05:00टालें
शुभ05:00 – 06:19शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2007:27दिन
शुक्र07:2708:35दिन
बुध08:3509:42दिन
चंद्र09:4210:49दिन
शनि10:4911:57दिन
गुरु11:5713:04दिन
मंगल13:0414:11दिन
सूर्य14:1115:19दिन
शुक्र15:1916:26दिन
बुध16:2617:33दिन
चंद्र17:3318:41दिन
शनि18:4119:48दिन
गुरु19:4820:40रात
मंगल20:4021:33रात
सूर्य21:3322:26रात
शुक्र22:2623:18रात
बुध23:1800:11रात
चंद्र00:1101:03रात
शनि01:0301:56रात
गुरु01:5602:48रात
मंगल02:4803:41रात
सूर्य03:4104:34रात
शुक्र04:3405:26रात
बुध05:2606:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।