5 नवंबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 5 नवंबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 5 नवंबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (00:19, 6 नव॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (15:10 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 19:58 पर है। राहुकाल 13:04 से 14:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 19:58
रात 06:08 तक
तिथि
पूर्णिमा, 00:19 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
अश्विनी, 15:10 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 00:19, 6 नव॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 20:25, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 12:04, 6 नव॰ तक
योग
सिद्धि 16:58 तक
व्यतीपातअशुभ 12:34, 6 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:14 तक
बव 00:19, 6 नव॰ तक
बालव 10:22, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
19:58
चंद्रोदय
19:50
चंद्रास्त
05:24
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
12:36 – 13:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:04 – 14:47
यमगंड
07:52 – 09:36
गुलिक काल
11:20 – 13:04

5 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:09 – 07:52शुभ
अमृत07:52 – 09:36शुभ
काल09:36 – 11:20टालें
शुभ11:20 – 13:04शुभ
रोग13:04 – 14:47टालें
उद्वेग14:47 – 16:31टालें
चर16:31 – 18:15सामान्य
लाभ18:15 – 19:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:58 – 21:15टालें
शुभ21:15 – 22:31शुभ
अमृत22:31 – 23:47शुभ
चर23:47 – 01:03सामान्य
रोग01:03 – 02:19टालें
काल02:19 – 03:35टालें
लाभ03:35 – 04:51शुभ
उद्वेग04:51 – 06:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0907:18दिन
चंद्र07:1808:27दिन
शनि08:2709:36दिन
गुरु09:3610:45दिन
मंगल10:4511:54दिन
सूर्य11:5413:04दिन
शुक्र13:0414:13दिन
बुध14:1315:22दिन
चंद्र15:2216:31दिन
शनि16:3117:40दिन
गुरु17:4018:49दिन
मंगल18:4919:58दिन
सूर्य19:5820:49रात
शुक्र20:4921:40रात
बुध21:4022:31रात
चंद्र22:3123:22रात
शनि23:2200:12रात
गुरु00:1201:03रात
मंगल01:0301:54रात
सूर्य01:5402:45रात
शुक्र02:4503:35रात
बुध03:3504:26रात
चंद्र04:2605:17रात
शनि05:1706:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2181° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।