31 दिसंबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 31 दिसंबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (10:31 तक), नक्षत्र भरणी (09:28 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 20:45 पर है। राहुकाल 13:22 से 15:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 20:45
रात 06:01 तक
तिथि
एकादशी, 10:31 तक
द्वादशी
नक्षत्र
भरणी, 09:28 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 10:31 तक
शुक्ल द्वादशी 07:18, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 09:28 तक
कृत्तिका 07:00, 1 जन॰ तक
योग
सिद्ध 06:32 तक
साध्य 02:43, 1 जन॰ तक
शुभ 22:42, 1 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:31 तक
बव 20:56 तक
बालव 07:18, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 14:53 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
20:45
चंद्रोदय
17:31
चंद्रास्त
02:22
दिनमान
14h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
12:53 – 13:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:22 – 15:13
यमगंड
07:51 – 09:41
गुलिक काल
11:32 – 13:22

31 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:00 – 07:51शुभ
अमृत07:51 – 09:41शुभ
काल09:41 – 11:32टालें
शुभ11:32 – 13:22शुभ
रोग13:22 – 15:13टालें
उद्वेग15:13 – 17:04टालें
चर17:04 – 18:54सामान्य
लाभ18:54 – 20:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग20:45 – 21:54टालें
शुभ21:54 – 23:04शुभ
अमृत23:04 – 00:13शुभ
चर00:13 – 01:23सामान्य
रोग01:23 – 02:32टालें
काल02:32 – 03:42टालें
लाभ03:42 – 04:51शुभ
उद्वेग04:51 – 06:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0007:14दिन
चंद्र07:1408:28दिन
शनि08:2809:41दिन
गुरु09:4110:55दिन
मंगल10:5512:09दिन
सूर्य12:0913:22दिन
शुक्र13:2214:36दिन
बुध14:3615:50दिन
चंद्र15:5017:04दिन
शनि17:0418:17दिन
गुरु18:1719:31दिन
मंगल19:3120:45दिन
सूर्य20:4521:31रात
शुक्र21:3122:17रात
बुध22:1723:04रात
चंद्र23:0423:50रात
शनि23:5000:37रात
गुरु00:3701:23रात
मंगल01:2302:09रात
सूर्य02:0902:56रात
शुक्र02:5603:42रात
बुध03:4204:28रात
चंद्र04:2805:15रात
शनि05:1506:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
7 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
23 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2202° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।