18 मार्च 2026 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 18 मार्च 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 18 मार्च 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (13:55 तक), नक्षत्र शतभिषा (11:39 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:20 पर और सूर्यास्त 19:35 पर है। राहुकाल 13:27 से 14:59 तक है।

दिन और रात
दिन 07:20 – 19:35
रात 07:21 तक
तिथि
चतुर्दशी, 13:55 तक
अमावस्या
नक्षत्र
शतभिषा, 11:39 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 मार्च 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 13:55 तक
अमावस्या 12:23, 19 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 11:39 तक
पूर्वा भाद्रपद 10:51, 19 मार्च तक
योग
साध्य 11:52 तक
शुभ 09:31, 19 मार्च तक
करण
शकुनि 13:55 तक
चतुष्पद 01:13, 19 मार्च तक
नाग 12:23, 19 मार्च तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:06, 19 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:20
सूर्यास्त
19:35
चंद्रोदय
06:06
चंद्रास्त
19:03
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:46 – 06:33
अभिजीत मुहूर्त
13:03 – 13:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:27 – 14:59
यमगंड
08:52 – 10:24
गुलिक काल
11:56 – 13:27

18 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:20 – 08:52शुभ
अमृत08:52 – 10:24शुभ
काल10:24 – 11:56टालें
शुभ11:56 – 13:27शुभ
रोग13:27 – 14:59टालें
उद्वेग14:59 – 16:31टालें
चर16:31 – 18:03सामान्य
लाभ18:03 – 19:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:35 – 21:03टालें
शुभ21:03 – 22:31शुभ
अमृत22:31 – 00:00शुभ
चर00:00 – 01:28सामान्य
रोग01:28 – 02:56टालें
काल02:56 – 04:25टालें
लाभ04:25 – 05:53शुभ
उद्वेग05:53 – 07:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:2008:21दिन
चंद्र08:2109:23दिन
शनि09:2310:24दिन
गुरु10:2411:25दिन
मंगल11:2512:26दिन
सूर्य12:2613:27दिन
शुक्र13:2714:29दिन
बुध14:2915:30दिन
चंद्र15:3016:31दिन
शनि16:3117:32दिन
गुरु17:3218:33दिन
मंगल18:3319:35दिन
सूर्य19:3520:34रात
शुक्र20:3421:32रात
बुध21:3222:31रात
चंद्र22:3123:30रात
शनि23:3000:29रात
गुरु00:2901:28रात
मंगल01:2802:27रात
सूर्य02:2703:26रात
शुक्र03:2604:25रात
बुध04:2505:23रात
चंद्र05:2306:22रात
शनि06:2207:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2232° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।