18 जनवरी 2027 को मेलबर्न का पंचांग

सोमवार, 18 जनवरी 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

सोमवार, 18 जनवरी 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (15:57 तक), नक्षत्र कृत्तिका (02:35, 19 जन॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 20:42 पर है। राहुकाल 08:05 से 09:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 20:42
रात 06:18 तक
तिथि
दशमी, 15:57 तक
एकादशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 02:35 तक
रोहिणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जनवरी 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल दशमी 15:57 तक
शुक्ल एकादशी 13:19, 19 जन॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 02:35, 19 जन॰ तक
रोहिणी 00:24, 20 जन॰ तक
योग
शुभ 15:03 तक
शुक्ल 11:43, 19 जन॰ तक
करण
गर 15:57 तक
वणिज 02:43, 19 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:19, 19 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 09:51 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
20:42
चंद्रोदय
16:34
चंद्रास्त
01:17
दिनमान
14h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:39
अभिजीत मुहूर्त
13:01 – 13:58

अशुभ समय

राहुकाल
08:05 – 09:53
यमगंड
11:41 – 13:30
गुलिक काल
15:18 – 17:06

18 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:17 – 08:05शुभ
काल08:05 – 09:53टालें
शुभ09:53 – 11:41शुभ
रोग11:41 – 13:30टालें
उद्वेग13:30 – 15:18टालें
चर15:18 – 17:06सामान्य
लाभ17:06 – 18:54शुभ
अमृत18:54 – 20:42शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर20:42 – 21:54सामान्य
रोग21:54 – 23:06टालें
काल23:06 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 01:30शुभ
उद्वेग01:30 – 02:42टालें
शुभ02:42 – 03:54शुभ
अमृत03:54 – 05:06शुभ
चर05:06 – 06:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1707:29दिन
शनि07:2908:41दिन
गुरु08:4109:53दिन
मंगल09:5311:05दिन
सूर्य11:0512:18दिन
शुक्र12:1813:30दिन
बुध13:3014:42दिन
चंद्र14:4215:54दिन
शनि15:5417:06दिन
गुरु17:0618:18दिन
मंगल18:1819:30दिन
सूर्य19:3020:42दिन
शुक्र20:4221:30रात
बुध21:3022:18रात
चंद्र22:1823:06रात
शनि23:0623:54रात
गुरु23:5400:42रात
मंगल00:4201:30रात
सूर्य01:3002:18रात
शुक्र02:1803:06रात
बुध03:0603:54रात
चंद्र03:5404:42रात
शनि04:4205:30रात
गुरु05:3006:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
26 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
11 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2349° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।