14 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (00:19, 15 अक्टू॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (04:00, 15 अक्टू॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 19:35 पर है। राहुकाल 14:43 से 16:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 19:35
रात 06:35 तक
तिथि
चतुर्दशी, 00:19 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 04:00 तक
रेवती
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 00:19, 15 अक्टू॰ तक
पूर्णिमा 00:46, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 04:00, 15 अक्टू॰ तक
रेवती 04:59, 16 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 21:46 तक
व्याघातअशुभ 21:05, 15 अक्टू॰ तक
करण
गर 11:53 तक
वणिज 00:19, 15 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:37, 15 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
19:35
चंद्रोदय
18:24
चंद्रास्त
05:31
दिनमान
12h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
12:40 – 13:32

अशुभ समय

राहुकाल
14:43 – 16:21
यमगंड
06:37 – 08:14
गुलिक काल
09:51 – 11:29

14 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:37 – 08:14शुभ
रोग08:14 – 09:51टालें
उद्वेग09:51 – 11:29टालें
चर11:29 – 13:06सामान्य
लाभ13:06 – 14:43शुभ
अमृत14:43 – 16:21शुभ
काल16:21 – 17:58टालें
शुभ17:58 – 19:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:35 – 20:58शुभ
चर20:58 – 22:20सामान्य
रोग22:20 – 23:43टालें
काल23:43 – 01:05टालें
लाभ01:05 – 02:28शुभ
उद्वेग02:28 – 03:50टालें
शुभ03:50 – 05:13शुभ
अमृत05:13 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3707:42दिन
मंगल07:4208:47दिन
सूर्य08:4709:51दिन
शुक्र09:5110:56दिन
बुध10:5612:01दिन
चंद्र12:0113:06दिन
शनि13:0614:11दिन
गुरु14:1115:16दिन
मंगल15:1616:21दिन
सूर्य16:2117:26दिन
शुक्र17:2618:31दिन
बुध18:3119:35दिन
चंद्र19:3520:30रात
शनि20:3021:25रात
गुरु21:2522:20रात
मंगल22:2023:15रात
सूर्य23:1500:10रात
शुक्र00:1001:05रात
बुध01:0502:00रात
चंद्र02:0002:55रात
शनि02:5503:50रात
गुरु03:5004:45रात
मंगल04:4505:40रात
सूर्य05:4006:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2452° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।