16 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

शनिवार, 16 अक्टूबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

शनिवार, 16 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:43, 17 अक्टू॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (05:29, 17 अक्टू॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 19:37 पर है। राहुकाल 09:50 से 11:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 19:37
रात 06:33 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:43 तक
द्वितीया
नक्षत्र
अश्विनी, 05:29 तक
भरणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:43, 17 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वितीया 00:13, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 05:29, 17 अक्टू॰ तक
भरणी 05:33, 18 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 19:59 तक
वज्रअशुभ 18:33, 17 अक्टू॰ तक
करण
बालव 12:48 तक
कौलव 00:43, 17 अक्टू॰ तक
तैतिल 12:31, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
19:37
चंद्रोदय
20:32
चंद्रास्त
06:23
दिनमान
13h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
12:40 – 13:32

अशुभ समय

राहुकाल
09:50 – 11:28
यमगंड
14:44 – 16:22
गुलिक काल
06:34 – 08:12

16 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:34 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:50शुभ
रोग09:50 – 11:28टालें
उद्वेग11:28 – 13:06टालें
चर13:06 – 14:44सामान्य
लाभ14:44 – 16:22शुभ
अमृत16:22 – 17:59शुभ
काल17:59 – 19:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:37 – 20:59शुभ
उद्वेग20:59 – 22:21टालें
शुभ22:21 – 23:43शुभ
अमृत23:43 – 01:05शुभ
चर01:05 – 02:27सामान्य
रोग02:27 – 03:49टालें
काल03:49 – 05:11टालें
लाभ05:11 – 06:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3407:39दिन
गुरु07:3908:45दिन
मंगल08:4509:50दिन
सूर्य09:5010:55दिन
शुक्र10:5512:00दिन
बुध12:0013:06दिन
चंद्र13:0614:11दिन
शनि14:1115:16दिन
गुरु15:1616:22दिन
मंगल16:2217:27दिन
सूर्य17:2718:32दिन
शुक्र18:3219:37दिन
बुध19:3720:32रात
चंद्र20:3221:27रात
शनि21:2722:21रात
गुरु22:2123:16रात
मंगल23:1600:10रात
सूर्य00:1001:05रात
शुक्र01:0502:00रात
बुध02:0002:54रात
चंद्र02:5403:49रात
शनि03:4904:43रात
गुरु04:4305:38रात
मंगल05:3806:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2452° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।