4 अक्टूबर 2028 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 4 अक्टूबर 2028, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 4 अक्टूबर 2028 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (05:34, 5 अक्टू॰ तक), नक्षत्र रेवती (05:58, 5 अक्टू॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 19:27 पर है। राहुकाल 13:09 से 14:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 19:27
रात 06:49 तक
तिथि
प्रतिपदा, 05:34 तक
नक्षत्र
रेवती, 05:58 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 05:34, 5 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वितीया 07:28, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 05:58, 5 अक्टू॰ तक
अश्विनी 08:24, 6 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 15:33 तक
व्याघातअशुभ 16:07, 5 अक्टू॰ तक
करण
बालव 16:31 तक
कौलव 05:34, 5 अक्टू॰ तक
तैतिल 18:33, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मीन 05:58, 5 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
19:27
चंद्रोदय
20:08
चंद्रास्त
06:36
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:34 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:09 – 14:43
यमगंड
08:25 – 10:00
गुलिक काल
11:34 – 13:09

4 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:50 – 08:25शुभ
अमृत08:25 – 10:00शुभ
काल10:00 – 11:34टालें
शुभ11:34 – 13:09शुभ
रोग13:09 – 14:43टालें
उद्वेग14:43 – 16:18टालें
चर16:18 – 17:52सामान्य
लाभ17:52 – 19:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:27 – 20:52टालें
शुभ20:52 – 22:17शुभ
अमृत22:17 – 23:43शुभ
चर23:43 – 01:08सामान्य
रोग01:08 – 02:33टालें
काल02:33 – 03:58टालें
लाभ03:58 – 05:24शुभ
उद्वेग05:24 – 06:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5007:54दिन
चंद्र07:5408:57दिन
शनि08:5710:00दिन
गुरु10:0011:03दिन
मंगल11:0312:06दिन
सूर्य12:0613:09दिन
शुक्र13:0914:12दिन
बुध14:1215:15दिन
चंद्र15:1516:18दिन
शनि16:1817:21दिन
गुरु17:2118:24दिन
मंगल18:2419:27दिन
सूर्य19:2720:24रात
शुक्र20:2421:20रात
बुध21:2022:17रात
चंद्र22:1723:14रात
शनि23:1400:11रात
गुरु00:1101:08रात
मंगल01:0802:05रात
सूर्य02:0503:02रात
शुक्र03:0203:58रात
बुध03:5804:55रात
चंद्र04:5505:52रात
शनि05:5206:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2588° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।