27 सितंबर 2029 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 27 सितंबर 2029, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 27 सितंबर 2029 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (11:50 तक), नक्षत्र भरणी (09:10 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 13:43 से 15:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 18:20
रात 06:00 तक
तिथि
चतुर्थी, 11:50 तक
पंचमी
नक्षत्र
भरणी, 09:10 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 सितंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 11:50 तक
कृष्ण पंचमी 14:20, 28 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 09:10 तक
कृत्तिका 12:12, 28 सित॰ तक
योग
हर्षण 09:25 तक
वज्रअशुभ 10:23, 28 सित॰ तक
करण
बालव 11:50 तक
कौलव 01:06, 28 सित॰ तक
तैतिल 14:20, 28 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 15:57 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
22:47
चंद्रास्त
07:54
दिनमान
12h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
13:43 – 15:16
यमगंड
06:02 – 07:34
गुलिक काल
09:06 – 10:39

27 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:02 – 07:34शुभ
रोग07:34 – 09:06टालें
उद्वेग09:06 – 10:39टालें
चर10:39 – 12:11सामान्य
लाभ12:11 – 13:43शुभ
अमृत13:43 – 15:16शुभ
काल15:16 – 16:48टालें
शुभ16:48 – 18:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:20 – 19:48शुभ
चर19:48 – 21:15सामान्य
रोग21:15 – 22:43टालें
काल22:43 – 00:10टालें
लाभ00:10 – 01:38शुभ
उद्वेग01:38 – 03:05टालें
शुभ03:05 – 04:33शुभ
अमृत04:33 – 06:00शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0207:03दिन
मंगल07:0308:05दिन
सूर्य08:0509:06दिन
शुक्र09:0610:08दिन
बुध10:0811:09दिन
चंद्र11:0912:11दिन
शनि12:1113:13दिन
गुरु13:1314:14दिन
मंगल14:1415:16दिन
सूर्य15:1616:17दिन
शुक्र16:1717:19दिन
बुध17:1918:20दिन
चंद्र18:2019:19रात
शनि19:1920:17रात
गुरु20:1721:15रात
मंगल21:1522:14रात
सूर्य22:1423:12रात
शुक्र23:1200:10रात
बुध00:1001:08रात
चंद्र01:0802:07रात
शनि02:0703:05रात
गुरु03:0504:03रात
मंगल04:0305:02रात
सूर्य05:0206:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2725° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।