18 अक्टूबर 2029 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2029, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2029 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (12:08 तक), नक्षत्र शतभिषा (02:30, 19 अक्टू॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:30 पर और सूर्यास्त 19:40 पर है। राहुकाल 14:44 से 16:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:30 – 19:40
रात 06:29 तक
तिथि
एकादशी, 12:08 तक
द्वादशी
नक्षत्र
शतभिषा, 02:30 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 12:08 तक
शुक्ल द्वादशी 13:48, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 02:30, 19 अक्टू॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 04:53, 20 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 12:07 तक
वृद्धि 12:21, 19 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:08 तक
बव 00:56, 19 अक्टू॰ तक
बालव 13:48, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
19:40
चंद्रोदय
15:55
चंद्रास्त
04:05
दिनमान
13h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
12:39 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
14:44 – 16:22
यमगंड
06:30 – 08:09
गुलिक काल
09:48 – 11:26

18 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:30 – 08:09शुभ
रोग08:09 – 09:48टालें
उद्वेग09:48 – 11:26टालें
चर11:26 – 13:05सामान्य
लाभ13:05 – 14:44शुभ
अमृत14:44 – 16:22शुभ
काल16:22 – 18:01टालें
शुभ18:01 – 19:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:40 – 21:01शुभ
चर21:01 – 22:22सामान्य
रोग22:22 – 23:43टालें
काल23:43 – 01:04टालें
लाभ01:04 – 02:26शुभ
उद्वेग02:26 – 03:47टालें
शुभ03:47 – 05:08शुभ
अमृत05:08 – 06:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3007:36दिन
मंगल07:3608:42दिन
सूर्य08:4209:48दिन
शुक्र09:4810:54दिन
बुध10:5411:59दिन
चंद्र11:5913:05दिन
शनि13:0514:11दिन
गुरु14:1115:17दिन
मंगल15:1716:22दिन
सूर्य16:2217:28दिन
शुक्र17:2818:34दिन
बुध18:3419:40दिन
चंद्र19:4020:34रात
शनि20:3421:28रात
गुरु21:2822:22रात
मंगल22:2223:16रात
सूर्य23:1600:10रात
शुक्र00:1001:04रात
बुध01:0401:59रात
चंद्र01:5902:53रात
शनि02:5303:47रात
गुरु03:4704:41रात
मंगल04:4105:35रात
सूर्य05:3506:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2733° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।