14 जुलाई 2025 को मुंबई का पंचांग

सोमवार, 14 जुलाई 2025, मुंबई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 जुलाई 2025 को मुंबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (00:00, 15 जुल॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (06:49 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 19:19 पर है। राहुकाल 07:47 से 09:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 19:19
रात 06:09 तक
तिथि
चतुर्थी, 00:00 तक
पंचमी
नक्षत्र
शतभिषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जुलाई 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 00:00, 15 जुल॰ तक
कृष्ण पंचमी 22:39, 15 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:26, 15 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 16:13 तक
सौभाग्य 14:12, 15 जुल॰ तक
करण
बव 12:33 तक
बालव 00:00, 15 जुल॰ तक
कौलव 11:22, 15 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
19:19
चंद्रोदय
22:05
चंद्रास्त
09:10
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
07:47 – 09:26
यमगंड
11:05 – 12:44
गुलिक काल
14:23 – 16:02

14 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:08 – 07:47शुभ
काल07:47 – 09:26टालें
शुभ09:26 – 11:05शुभ
रोग11:05 – 12:44टालें
उद्वेग12:44 – 14:23टालें
चर14:23 – 16:02सामान्य
लाभ16:02 – 17:40शुभ
अमृत17:40 – 19:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:19 – 20:40सामान्य
रोग20:40 – 22:02टालें
काल22:02 – 23:23टालें
लाभ23:23 – 00:44शुभ
उद्वेग00:44 – 02:05टालें
शुभ02:05 – 03:26शुभ
अमृत03:26 – 04:48शुभ
चर04:48 – 06:09सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0807:14दिन
शनि07:1408:20दिन
गुरु08:2009:26दिन
मंगल09:2610:32दिन
सूर्य10:3211:38दिन
शुक्र11:3812:44दिन
बुध12:4413:50दिन
चंद्र13:5014:56दिन
शनि14:5616:02दिन
गुरु16:0217:07दिन
मंगल17:0718:13दिन
सूर्य18:1319:19दिन
शुक्र19:1920:13रात
बुध20:1321:07रात
चंद्र21:0722:02रात
शनि22:0222:56रात
गुरु22:5623:50रात
मंगल23:5000:44रात
सूर्य00:4401:38रात
शुक्र01:3802:32रात
बुध02:3203:26रात
चंद्र03:2604:21रात
शनि04:2105:15रात
गुरु05:1506:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां मुंबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2137° (लाहिड़ी)। समय मुंबई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।