2 मार्च 2026 को मस्कट का पंचांग

सोमवार, 2 मार्च 2026, मस्कट, Oman। समय Asia/Muscat में है।

सोमवार, 2 मार्च 2026 को मस्कट में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (16:26 तक), नक्षत्र मघा (06:01, 3 मार्च तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 07:55 से 09:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 18:09
रात 06:26 तक
तिथि
चतुर्दशी, 16:26 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
मघा, 06:01 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 मार्च 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 16:26 तक
पूर्णिमा 15:37, 3 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 06:01, 3 मार्च तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:09, 4 मार्च तक
योग
अतिगंडअशुभ 10:49 तक
सुकर्मा 08:54, 3 मार्च तक
करण
वणिज 16:26 तक
विष्टि (भद्रा) 03:58, 3 मार्च तक
बव 15:37, 3 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
17:15
चंद्रास्त
05:39
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
07:55 – 09:23
यमगंड
10:50 – 12:18
गुलिक काल
13:46 – 15:14

2 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:27 – 07:55शुभ
काल07:55 – 09:23टालें
शुभ09:23 – 10:50शुभ
रोग10:50 – 12:18टालें
उद्वेग12:18 – 13:46टालें
चर13:46 – 15:14सामान्य
लाभ15:14 – 16:41शुभ
अमृत16:41 – 18:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:09 – 19:41सामान्य
रोग19:41 – 21:13टालें
काल21:13 – 22:46टालें
लाभ22:46 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:50टालें
शुभ01:50 – 03:22शुभ
अमृत03:22 – 04:54शुभ
चर04:54 – 06:26सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2707:26दिन
शनि07:2608:24दिन
गुरु08:2409:23दिन
मंगल09:2310:21दिन
सूर्य10:2111:20दिन
शुक्र11:2012:18दिन
बुध12:1813:17दिन
चंद्र13:1714:15दिन
शनि14:1515:14दिन
गुरु15:1416:12दिन
मंगल16:1217:11दिन
सूर्य17:1118:09दिन
शुक्र18:0919:11रात
बुध19:1120:12रात
चंद्र20:1221:13रात
शनि21:1322:15रात
गुरु22:1523:16रात
मंगल23:1600:18रात
सूर्य00:1801:19रात
शुक्र01:1902:21रात
बुध02:2103:22रात
चंद्र03:2204:23रात
शनि04:2305:25रात
गुरु05:2506:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मस्कट में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2226° (लाहिड़ी)। समय मस्कट (Asia/Muscat) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।