24 जनवरी 2029 को मैसूरु का पंचांग

बुधवार, 24 जनवरी 2029, मैसूरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 24 जनवरी 2029 को मैसूरु में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (15:43 तक), नक्षत्र भरणी (12:15 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 18:21 पर है। राहुकाल 12:35 से 14:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 18:21
रात 06:49 तक
तिथि
नवमी, 15:43 तक
दशमी
नक्षत्र
भरणी, 12:15 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 जनवरी 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 15:43 तक
शुक्ल दशमी 16:50, 25 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 12:15 तक
कृत्तिका 13:58, 25 जन॰ तक
योग
शुभ 11:42 तक
शुक्ल 11:31, 25 जन॰ तक
करण
कौलव 15:43 तक
तैतिल 04:22, 25 जन॰ तक
गर 16:50, 25 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 18:44 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
18:21
चंद्रोदय
12:58
चंद्रास्त
01:14
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:58 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:35 – 14:02
यमगंड
08:15 – 09:42
गुलिक काल
11:09 – 12:35

24 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:49 – 08:15शुभ
अमृत08:15 – 09:42शुभ
काल09:42 – 11:09टालें
शुभ11:09 – 12:35शुभ
रोग12:35 – 14:02टालें
उद्वेग14:02 – 15:28टालें
चर15:28 – 16:55सामान्य
लाभ16:55 – 18:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:21 – 19:55टालें
शुभ19:55 – 21:28शुभ
अमृत21:28 – 23:02शुभ
चर23:02 – 00:35सामान्य
रोग00:35 – 02:09टालें
काल02:09 – 03:42टालें
लाभ03:42 – 05:15शुभ
उद्वेग05:15 – 06:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4907:46दिन
चंद्र07:4608:44दिन
शनि08:4409:42दिन
गुरु09:4210:40दिन
मंगल10:4011:37दिन
सूर्य11:3712:35दिन
शुक्र12:3513:33दिन
बुध13:3314:31दिन
चंद्र14:3115:28दिन
शनि15:2816:26दिन
गुरु16:2617:24दिन
मंगल17:2418:21दिन
सूर्य18:2119:24रात
शुक्र19:2420:26रात
बुध20:2621:28रात
चंद्र21:2822:31रात
शनि22:3123:33रात
गुरु23:3300:35रात
मंगल00:3501:37रात
सूर्य01:3702:40रात
शुक्र02:4003:42रात
बुध03:4204:44रात
चंद्र04:4405:46रात
शनि05:4606:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मैसूरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2631° (लाहिड़ी)। समय मैसूरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।