27 दिसंबर 2024 को नांदेड़ का पंचांग

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2024, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2024 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (02:27, 28 दिस॰ तक), नक्षत्र विशाखा (20:28 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 10:59 से 12:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:52 – 17:51
रात 06:52 तक
तिथि
द्वादशी, 02:27 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
विशाखा, 20:28 तक
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 दिसंबर 2024 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 02:27, 28 दिस॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 03:33, 29 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 20:28 तक
अनुराधा 22:13, 28 दिस॰ तक
योग
धृति 22:37 तक
शूलअशुभ 22:23, 28 दिस॰ तक
करण
कौलव 13:40 तक
तैतिल 02:27, 28 दिस॰ तक
गर 15:04, 28 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 13:56 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
03:29
चंद्रास्त
14:46
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
10:59 – 12:21
यमगंड
15:06 – 16:29
गुलिक काल
08:14 – 09:37

27 दिसंबर 2024 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:52 – 08:14सामान्य
लाभ08:14 – 09:37शुभ
अमृत09:37 – 10:59शुभ
काल10:59 – 12:21टालें
शुभ12:21 – 13:44शुभ
रोग13:44 – 15:06टालें
उद्वेग15:06 – 16:29टालें
चर16:29 – 17:51सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:51 – 19:29टालें
काल19:29 – 21:06टालें
लाभ21:06 – 22:44शुभ
उद्वेग22:44 – 00:22टालें
शुभ00:22 – 01:59शुभ
अमृत01:59 – 03:37शुभ
चर03:37 – 05:15सामान्य
रोग05:15 – 06:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5207:47दिन
बुध07:4708:42दिन
चंद्र08:4209:37दिन
शनि09:3710:32दिन
गुरु10:3211:26दिन
मंगल11:2612:21दिन
सूर्य12:2113:16दिन
शुक्र13:1614:11दिन
बुध14:1115:06दिन
चंद्र15:0616:01दिन
शनि16:0116:56दिन
गुरु16:5617:51दिन
मंगल17:5118:56रात
सूर्य18:5620:01रात
शुक्र20:0121:06रात
बुध21:0622:11रात
चंद्र22:1123:17रात
शनि23:1700:22रात
गुरु00:2201:27रात
मंगल01:2702:32रात
सूर्य02:3203:37रात
शुक्र03:3704:42रात
बुध04:4205:47रात
चंद्र05:4706:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 दिस॰ 2024प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 दिस॰ 2024पौष अमावस्याअमावस्या
3 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2061° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।