8 मार्च 2028 को नांदेड़ का पंचांग

बुधवार, 8 मार्च 2028, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 मार्च 2028 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (17:27 तक), नक्षत्र पुष्य (15:00 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 12:31 से 14:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 18:28
रात 06:33 तक
तिथि
द्वादशी, 17:27 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पुष्य, 15:00 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 मार्च 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 17:27 तक
शुक्ल त्रयोदशी 14:02, 9 मार्च तक
नक्षत्र
पुष्य 15:00 तक
आश्लेषा 12:22, 9 मार्च तक
योग
शोभन 08:48 तक
अतिगंडअशुभ 04:56, 9 मार्च तक
सुकर्मा 00:48, 10 मार्च तक
करण
बव 07:02 तक
बालव 17:27 तक
कौलव 03:47, 9 मार्च तक
तैतिल 14:02, 9 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
15:45
चंद्रास्त
04:08
दिनमान
11h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:31 – 14:00
यमगंड
08:03 – 09:33
गुलिक काल
11:02 – 12:31

8 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:34 – 08:03शुभ
अमृत08:03 – 09:33शुभ
काल09:33 – 11:02टालें
शुभ11:02 – 12:31शुभ
रोग12:31 – 14:00टालें
उद्वेग14:00 – 15:30टालें
चर15:30 – 16:59सामान्य
लाभ16:59 – 18:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:28 – 19:59टालें
शुभ19:59 – 21:29शुभ
अमृत21:29 – 23:00शुभ
चर23:00 – 00:31सामान्य
रोग00:31 – 02:01टालें
काल02:01 – 03:32टालें
लाभ03:32 – 05:03शुभ
उद्वेग05:03 – 06:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3407:34दिन
चंद्र07:3408:33दिन
शनि08:3309:33दिन
गुरु09:3310:32दिन
मंगल10:3211:32दिन
सूर्य11:3212:31दिन
शुक्र12:3113:31दिन
बुध13:3114:30दिन
चंद्र14:3015:30दिन
शनि15:3016:29दिन
गुरु16:2917:29दिन
मंगल17:2918:28दिन
सूर्य18:2819:28रात
शुक्र19:2820:29रात
बुध20:2921:29रात
चंद्र21:2922:30रात
शनि22:3023:30रात
गुरु23:3000:31रात
मंगल00:3101:31रात
सूर्य01:3102:32रात
शुक्र02:3203:32रात
बुध03:3204:32रात
चंद्र04:3205:33रात
शनि05:3306:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2508° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।