15 अगस्त 2028 को नांदेड़ का पंचांग

मंगलवार, 15 अगस्त 2028, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 15 अगस्त 2028 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (05:12, 16 अग॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (18:20 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 15:36 से 17:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:48
रात 06:02 तक
तिथि
दशमी, 05:12 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 18:20 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अगस्त 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 05:12, 16 अग॰ तक
कृष्ण एकादशी 03:49, 17 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 18:20 तक
मृगशिरा 18:02, 16 अग॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 20:06 तक
हर्षण 18:12, 16 अग॰ तक
करण
वणिज 17:35 तक
विष्टि (भद्रा) 05:12, 16 अग॰ तक
बव 16:36, 16 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
00:30
चंद्रास्त
14:16
दिनमान
12h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
15:36 – 17:12
यमगंड
09:13 – 10:49
गुलिक काल
12:25 – 14:00

15 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:01 – 07:37टालें
उद्वेग07:37 – 09:13टालें
चर09:13 – 10:49सामान्य
लाभ10:49 – 12:25शुभ
अमृत12:25 – 14:00शुभ
काल14:00 – 15:36टालें
शुभ15:36 – 17:12शुभ
रोग17:12 – 18:48टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:48 – 20:12टालें
लाभ20:12 – 21:36शुभ
उद्वेग21:36 – 23:00टालें
शुभ23:00 – 00:25शुभ
अमृत00:25 – 01:49शुभ
चर01:49 – 03:13सामान्य
रोग03:13 – 04:37टालें
काल04:37 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0107:05दिन
सूर्य07:0508:09दिन
शुक्र08:0909:13दिन
बुध09:1310:17दिन
चंद्र10:1711:21दिन
शनि11:2112:25दिन
गुरु12:2513:28दिन
मंगल13:2814:32दिन
सूर्य14:3215:36दिन
शुक्र15:3616:40दिन
बुध16:4017:44दिन
चंद्र17:4418:48दिन
शनि18:4819:44रात
गुरु19:4420:40रात
मंगल20:4021:36रात
सूर्य21:3622:32रात
शुक्र22:3223:29रात
बुध23:2900:25रात
चंद्र00:2501:21रात
शनि01:2102:17रात
गुरु02:1703:13रात
मंगल03:1304:09रात
सूर्य04:0905:05रात
शुक्र05:0506:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2569° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।