16 नवंबर 2028 को नांदेड़ का पंचांग

गुरुवार, 16 नवंबर 2028, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 16 नवंबर 2028 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (18:47 तक), नक्षत्र विशाखा (23:35 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 17:41 पर है। राहुकाल 13:29 से 14:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 17:41
रात 06:29 तक
तिथि
अमावस्या, 18:47 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
विशाखा, 23:35 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 नवंबर 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 18:47 तक
शुक्ल प्रतिपदा 16:25, 17 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 23:35 तक
अनुराधा 22:02, 17 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 07:06 तक
शोभन 03:46, 17 नव॰ तक
अतिगंडअशुभ 00:48, 18 नव॰ तक
करण
चतुष्पद 08:08 तक
नाग 18:47 तक
किंस्तुघ्न 05:33, 17 नव॰ तक
बव 16:25, 17 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 18:02 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
17:41
चंद्रोदय
06:02
चंद्रास्त
17:24
दिनमान
11h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
13:29 – 14:53
यमगंड
06:28 – 07:53
गुलिक काल
09:17 – 10:41

16 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:28 – 07:53शुभ
रोग07:53 – 09:17टालें
उद्वेग09:17 – 10:41टालें
चर10:41 – 12:05सामान्य
लाभ12:05 – 13:29शुभ
अमृत13:29 – 14:53शुभ
काल14:53 – 16:17टालें
शुभ16:17 – 17:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:41 – 19:17शुभ
चर19:17 – 20:53सामान्य
रोग20:53 – 22:29टालें
काल22:29 – 00:05टालें
लाभ00:05 – 01:41शुभ
उद्वेग01:41 – 03:17टालें
शुभ03:17 – 04:53शुभ
अमृत04:53 – 06:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2807:25दिन
मंगल07:2508:21दिन
सूर्य08:2109:17दिन
शुक्र09:1710:13दिन
बुध10:1311:09दिन
चंद्र11:0912:05दिन
शनि12:0513:01दिन
गुरु13:0113:57दिन
मंगल13:5714:53दिन
सूर्य14:5315:49दिन
शुक्र15:4916:45दिन
बुध16:4517:41दिन
चंद्र17:4118:45रात
शनि18:4519:49रात
गुरु19:4920:53रात
मंगल20:5321:57रात
सूर्य21:5723:01रात
शुक्र23:0100:05रात
बुध00:0501:09रात
चंद्र01:0902:13रात
शनि02:1303:17रात
गुरु03:1704:21रात
मंगल04:2105:25रात
सूर्य05:2506:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2604° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।