7 जनवरी 2025 को नेल्लोर का पंचांग

मंगलवार, 7 जनवरी 2025, नेल्लोर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 7 जनवरी 2025 को नेल्लोर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (16:27 तक), नक्षत्र रेवती (17:50 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:36 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 15:06 से 16:31 तक है।

दिन और रात
दिन 06:36 – 17:55
रात 06:37 तक
तिथि
अष्टमी, 16:27 तक
नवमी
नक्षत्र
रेवती, 17:50 तक
अश्विनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 जनवरी 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 16:27 तक
शुक्ल नवमी 14:26, 8 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 17:50 तक
अश्विनी 16:29, 8 जन॰ तक
योग
शिव 23:15 तक
सिद्ध 20:23, 8 जन॰ तक
करण
बव 16:27 तक
बालव 03:27, 8 जन॰ तक
कौलव 14:26, 8 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 17:50 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
12:06
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
15:06 – 16:31
यमगंड
09:26 – 10:51
गुलिक काल
12:16 – 13:41

7 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:36 – 08:01टालें
उद्वेग08:01 – 09:26टालें
चर09:26 – 10:51सामान्य
लाभ10:51 – 12:16शुभ
अमृत12:16 – 13:41शुभ
काल13:41 – 15:06टालें
शुभ15:06 – 16:31शुभ
रोग16:31 – 17:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:55 – 19:31टालें
लाभ19:31 – 21:06शुभ
उद्वेग21:06 – 22:41टालें
शुभ22:41 – 00:16शुभ
अमृत00:16 – 01:51शुभ
चर01:51 – 03:26सामान्य
रोग03:26 – 05:01टालें
काल05:01 – 06:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3607:33दिन
सूर्य07:3308:30दिन
शुक्र08:3009:26दिन
बुध09:2610:23दिन
चंद्र10:2311:19दिन
शनि11:1912:16दिन
गुरु12:1613:12दिन
मंगल13:1214:09दिन
सूर्य14:0915:06दिन
शुक्र15:0616:02दिन
बुध16:0216:59दिन
चंद्र16:5917:55दिन
शनि17:5518:59रात
गुरु18:5920:02रात
मंगल20:0221:06रात
सूर्य21:0622:09रात
शुक्र22:0923:13रात
बुध23:1300:16रात
चंद्र00:1601:19रात
शनि01:1902:23रात
गुरु02:2303:26रात
मंगल03:2604:30रात
सूर्य04:3005:33रात
शुक्र05:3306:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नेल्लोर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2065° (लाहिड़ी)। समय नेल्लोर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।