27 अक्टूबर 2027 को नेल्लोर का पंचांग

बुधवार, 27 अक्टूबर 2027, नेल्लोर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को नेल्लोर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:50 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (13:01 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 11:53 से 13:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 17:44
रात 06:03 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:50 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 13:01 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:50 तक
कृष्ण चतुर्दशी 20:48, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 11:36, 28 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 08:42 तक
वैधृतिअशुभ 05:45, 28 अक्टू॰ तक
विष्कंभअशुभ 03:01, 29 अक्टू॰ तक
करण
गर 11:56 तक
वणिज 22:50 तक
विष्टि (भद्रा) 09:47, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
03:42
चंद्रास्त
15:55
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:17 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:53 – 13:21
यमगंड
07:31 – 08:58
गुलिक काल
10:26 – 11:53

27 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:03 – 07:31शुभ
अमृत07:31 – 08:58शुभ
काल08:58 – 10:26टालें
शुभ10:26 – 11:53शुभ
रोग11:53 – 13:21टालें
उद्वेग13:21 – 14:48टालें
चर14:48 – 16:16सामान्य
लाभ16:16 – 17:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:44 – 19:16टालें
शुभ19:16 – 20:49शुभ
अमृत20:49 – 22:21शुभ
चर22:21 – 23:54सामान्य
रोग23:54 – 01:26टालें
काल01:26 – 02:58टालें
लाभ02:58 – 04:31शुभ
उद्वेग04:31 – 06:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0307:02दिन
चंद्र07:0208:00दिन
शनि08:0008:58दिन
गुरु08:5809:57दिन
मंगल09:5710:55दिन
सूर्य10:5511:53दिन
शुक्र11:5312:52दिन
बुध12:5213:50दिन
चंद्र13:5014:48दिन
शनि14:4815:47दिन
गुरु15:4716:45दिन
मंगल16:4517:44दिन
सूर्य17:4418:45रात
शुक्र18:4519:47रात
बुध19:4720:49रात
चंद्र20:4921:50रात
शनि21:5022:52रात
गुरु22:5223:54रात
मंगल23:5400:55रात
सूर्य00:5501:57रात
शुक्र01:5702:58रात
बुध02:5804:00रात
चंद्र04:0005:02रात
शनि05:0206:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नेल्लोर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2457° (लाहिड़ी)। समय नेल्लोर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।