2 अक्टूबर 2029 को नेल्लोर का पंचांग

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2029, नेल्लोर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2029 को नेल्लोर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (15:08 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (15:22 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 14:59 से 16:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 17:58
रात 05:59 तक
तिथि
नवमी, 15:08 तक
दशमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 15:22 तक
पुष्य
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 15:08 तक
कृष्ण दशमी 14:31, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 15:24, 3 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 06:25 तक
शिव 05:05, 3 अक्टू॰ तक
सिद्ध 03:04, 4 अक्टू॰ तक
करण
गर 15:08 तक
वणिज 02:56, 3 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:31, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 09:13 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
00:29
चंद्रास्त
13:36
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
14:59 – 16:28
यमगंड
08:59 – 10:29
गुलिक काल
11:59 – 13:29

2 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:59 – 07:29टालें
उद्वेग07:29 – 08:59टालें
चर08:59 – 10:29सामान्य
लाभ10:29 – 11:59शुभ
अमृत11:59 – 13:29शुभ
काल13:29 – 14:59टालें
शुभ14:59 – 16:28शुभ
रोग16:28 – 17:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:58 – 19:28टालें
लाभ19:28 – 20:59शुभ
उद्वेग20:59 – 22:29टालें
शुभ22:29 – 23:59शुभ
अमृत23:59 – 01:29शुभ
चर01:29 – 02:59सामान्य
रोग02:59 – 04:29टालें
काल04:29 – 05:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5906:59दिन
सूर्य06:5907:59दिन
शुक्र07:5908:59दिन
बुध08:5909:59दिन
चंद्र09:5910:59दिन
शनि10:5911:59दिन
गुरु11:5912:59दिन
मंगल12:5913:59दिन
सूर्य13:5914:59दिन
शुक्र14:5915:58दिन
बुध15:5816:58दिन
चंद्र16:5817:58दिन
शनि17:5818:58रात
गुरु18:5819:58रात
मंगल19:5820:59रात
सूर्य20:5921:59रात
शुक्र21:5922:59रात
बुध22:5923:59रात
चंद्र23:5900:59रात
शनि00:5901:59रात
गुरु01:5902:59रात
मंगल02:5903:59रात
सूर्य03:5904:59रात
शुक्र04:5905:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नेल्लोर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2727° (लाहिड़ी)। समय नेल्लोर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।