21 अगस्त 2000 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 21 अगस्त 2000, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 21 अगस्त 2000 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (14:08 तक), नक्षत्र अश्विनी (08:02 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:54 पर है। राहुकाल 07:31 से 09:08 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:54
रात 05:54 तक
तिथि
षष्ठी, 14:08 तक
सप्तमी
नक्षत्र
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अगस्त 2000 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 14:08 तक
कृष्ण सप्तमी 13:03, 22 अग॰ तक
नक्षत्र
भरणी 07:48, 22 अग॰ तक
योग
वृद्धि 22:49 तक
ध्रुव 20:45, 22 अग॰ तक
करण
वणिज 14:08 तक
विष्टि (भद्रा) 01:39, 22 अग॰ तक
बव 13:03, 22 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:54
चंद्रोदय
22:52
चंद्रास्त
11:15
दिनमान
13h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2057
शक संवत
1922, विक्रम संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
07:31 – 09:08
यमगंड
10:46 – 12:24
गुलिक काल
14:01 – 15:39

21 अगस्त 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:53 – 07:31शुभ
काल07:31 – 09:08टालें
शुभ09:08 – 10:46शुभ
रोग10:46 – 12:24टालें
उद्वेग12:24 – 14:01टालें
चर14:01 – 15:39सामान्य
लाभ15:39 – 17:16शुभ
अमृत17:16 – 18:54शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:54 – 20:16सामान्य
रोग20:16 – 21:39टालें
काल21:39 – 23:01टालें
लाभ23:01 – 00:24शुभ
उद्वेग00:24 – 01:46टालें
शुभ01:46 – 03:09शुभ
अमृत03:09 – 04:31शुभ
चर04:31 – 05:54सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5306:58दिन
शनि06:5808:03दिन
गुरु08:0309:08दिन
मंगल09:0810:13दिन
सूर्य10:1311:18दिन
शुक्र11:1812:24दिन
बुध12:2413:29दिन
चंद्र13:2914:34दिन
शनि14:3415:39दिन
गुरु15:3916:44दिन
मंगल16:4417:49दिन
सूर्य17:4918:54दिन
शुक्र18:5419:49रात
बुध19:4920:44रात
चंद्र20:4421:39रात
शनि21:3922:34रात
गुरु22:3423:29रात
मंगल23:2900:24रात
सूर्य00:2401:19रात
शुक्र01:1902:14रात
बुध02:1403:09रात
चंद्र03:0904:04रात
शनि04:0404:59रात
गुरु04:5905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अग॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अग॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अग॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अग॰ 2000भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
2 सित॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 सित॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 सित॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 सित॰ 2000भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
16 सित॰ 2000कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8659° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।