6 दिसंबर 2000 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 6 दिसंबर 2000, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 6 दिसंबर 2000 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (23:46 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (15:37 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 12:12 से 13:30 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 17:24
रात 07:00 तक
तिथि
दशमी, 23:46 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 15:37 तक
रेवती
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 दिसंबर 2000 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 23:46 तक
शुक्ल एकादशी 23:16, 7 दिस॰ तक
नक्षत्र
रेवती 15:59, 7 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 08:34 तक
व्यतीपातअशुभ 07:25, 7 दिस॰ तक
करण
तैतिल 11:42 तक
गर 23:46 तक
वणिज 11:37, 7 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
14:05
चंद्रास्त
01:32
दिनमान
10h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2057
शक संवत
1922, विक्रम संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:32 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:12 – 13:30
यमगंड
08:18 – 09:36
गुलिक काल
10:54 – 12:12

6 दिसंबर 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:00 – 08:18शुभ
अमृत08:18 – 09:36शुभ
काल09:36 – 10:54टालें
शुभ10:54 – 12:12शुभ
रोग12:12 – 13:30टालें
उद्वेग13:30 – 14:48टालें
चर14:48 – 16:06सामान्य
लाभ16:06 – 17:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:24 – 19:06टालें
शुभ19:06 – 20:48शुभ
अमृत20:48 – 22:30शुभ
चर22:30 – 00:12सामान्य
रोग00:12 – 01:54टालें
काल01:54 – 03:36टालें
लाभ03:36 – 05:18शुभ
उद्वेग05:18 – 07:00टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0007:52दिन
चंद्र07:5208:44दिन
शनि08:4409:36दिन
गुरु09:3610:28दिन
मंगल10:2811:20दिन
सूर्य11:2012:12दिन
शुक्र12:1213:04दिन
बुध13:0413:56दिन
चंद्र13:5614:48दिन
शनि14:4815:40दिन
गुरु15:4016:32दिन
मंगल16:3217:24दिन
सूर्य17:2418:32रात
शुक्र18:3219:40रात
बुध19:4020:48रात
चंद्र20:4821:56रात
शनि21:5623:04रात
गुरु23:0400:12रात
मंगल00:1201:20रात
सूर्य01:2002:28रात
शुक्र02:2803:36रात
बुध03:3604:44रात
चंद्र04:4405:52रात
शनि05:5207:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 दिस॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 दिस॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 दिस॰ 2000मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
14 दिस॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 दिस॰ 2000धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 दिस॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 दिस॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 दिस॰ 2000पौष अमावस्याअमावस्या
29 दिस॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8700° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।