13 जून 2001 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 13 जून 2001, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 13 जून 2001 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (19:56 तक), नक्षत्र शतभिषा (14:24 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 19:19 पर है। राहुकाल 12:21 से 14:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 19:19
रात 05:22 तक
तिथि
सप्तमी, 19:56 तक
अष्टमी
नक्षत्र
शतभिषा, 14:24 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जून 2001 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 19:56 तक
कृष्ण अष्टमी 21:53, 14 जून तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:24 तक
पूर्वा भाद्रपद 17:01, 14 जून तक
योग
प्रीति 05:29, 14 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:49 तक
बव 19:56 तक
बालव 08:58, 14 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
19:19
चंद्रोदय
00:07
चंद्रास्त
11:31
दिनमान
13h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:49 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:21 – 14:05
यमगंड
07:07 – 08:51
गुलिक काल
10:36 – 12:21

13 जून 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:22 – 07:07शुभ
अमृत07:07 – 08:51शुभ
काल08:51 – 10:36टालें
शुभ10:36 – 12:21शुभ
रोग12:21 – 14:05टालें
उद्वेग14:05 – 15:50टालें
चर15:50 – 17:35सामान्य
लाभ17:35 – 19:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:19 – 20:35टालें
शुभ20:35 – 21:50शुभ
अमृत21:50 – 23:05शुभ
चर23:05 – 00:21सामान्य
रोग00:21 – 01:36टालें
काल01:36 – 02:52टालें
लाभ02:52 – 04:07शुभ
उद्वेग04:07 – 05:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2206:32दिन
चंद्र06:3207:42दिन
शनि07:4208:51दिन
गुरु08:5110:01दिन
मंगल10:0111:11दिन
सूर्य11:1112:21दिन
शुक्र12:2113:30दिन
बुध13:3014:40दिन
चंद्र14:4015:50दिन
शनि15:5017:00दिन
गुरु17:0018:09दिन
मंगल18:0919:19दिन
सूर्य19:1920:09रात
शुक्र20:0921:00रात
बुध21:0021:50रात
चंद्र21:5022:40रात
शनि22:4023:30रात
गुरु23:3000:21रात
मंगल00:2101:11रात
सूर्य01:1102:01रात
शुक्र02:0102:52रात
बुध02:5203:42रात
चंद्र03:4204:32रात
शनि04:3205:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जून 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2001मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जून 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 जून 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जून 2001आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
25 जून 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 जुल॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 जुल॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 जुल॰ 2001आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
9 जुल॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8773° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।