7 नवंबर 2001 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 7 नवंबर 2001, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 7 नवंबर 2001 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (08:26 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (09:13 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:31 पर है। राहुकाल 12:04 से 13:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:31
रात 06:38 तक
तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
पुष्य
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 नवंबर 2001 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 08:26 तक
कृष्ण सप्तमी 06:47, 8 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 08:14, 8 नव॰ तक
योग
साध्य 07:44 तक
शुभ 05:14, 8 नव॰ तक
शुक्ल 02:29, 9 नव॰ तक
करण
वणिज 08:26 तक
विष्टि (भद्रा) 19:39 तक
बव 06:47, 8 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:31
चंद्रोदय
22:56
चंद्रास्त
12:14
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:04 – 13:26
यमगंड
07:59 – 09:21
गुलिक काल
10:42 – 12:04

7 नवंबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:37 – 07:59शुभ
अमृत07:59 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:42टालें
शुभ10:42 – 12:04शुभ
रोग12:04 – 13:26टालें
उद्वेग13:26 – 14:48टालें
चर14:48 – 16:10सामान्य
लाभ16:10 – 17:31शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:31 – 19:10टालें
शुभ19:10 – 20:48शुभ
अमृत20:48 – 22:26शुभ
चर22:26 – 00:05सामान्य
रोग00:05 – 01:43टालें
काल01:43 – 03:21टालें
लाभ03:21 – 04:59शुभ
उद्वेग04:59 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3707:31दिन
चंद्र07:3108:26दिन
शनि08:2609:21दिन
गुरु09:2110:15दिन
मंगल10:1511:10दिन
सूर्य11:1012:04दिन
शुक्र12:0412:59दिन
बुध12:5913:53दिन
चंद्र13:5314:48दिन
शनि14:4815:42दिन
गुरु15:4216:37दिन
मंगल16:3717:31दिन
सूर्य17:3118:37रात
शुक्र18:3719:42रात
बुध19:4220:48रात
चंद्र20:4821:54रात
शनि21:5422:59रात
गुरु22:5900:05रात
मंगल00:0501:10रात
सूर्य01:1002:16रात
शुक्र02:1603:21रात
बुध03:2104:27रात
चंद्र04:2705:32रात
शनि05:3206:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 नव॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 नव॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 नव॰ 2001कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2001वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 नव॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 नव॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 नव॰ 2001कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
4 दिस॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8829° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।