30 नवंबर 2001 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 30 नवंबर 2001, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 30 नवंबर 2001 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (02:19, 1 दिस॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (17:35 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 10:51 से 12:09 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 17:23
रात 06:56 तक
तिथि
पूर्णिमा, 02:19 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
कृत्तिका, 17:35 तक
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 नवंबर 2001 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
पूर्णिमा 02:19, 1 दिस॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 01:24, 2 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:28, 1 दिस॰ तक
योग
शिव 21:16 तक
सिद्ध 19:26, 1 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:35 तक
बव 02:19, 1 दिस॰ तक
बालव 13:55, 1 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
17:09
चंद्रास्त
06:06
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 06:01
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
10:51 – 12:09
यमगंड
14:46 – 16:05
गुलिक काल
08:14 – 09:32

30 नवंबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:55 – 08:14सामान्य
लाभ08:14 – 09:32शुभ
अमृत09:32 – 10:51शुभ
काल10:51 – 12:09टालें
शुभ12:09 – 13:28शुभ
रोग13:28 – 14:46टालें
उद्वेग14:46 – 16:05टालें
चर16:05 – 17:23सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:23 – 19:05टालें
काल19:05 – 20:46टालें
लाभ20:46 – 22:28शुभ
उद्वेग22:28 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:51शुभ
अमृत01:51 – 03:33शुभ
चर03:33 – 05:14सामान्य
रोग05:14 – 06:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5507:47दिन
बुध07:4708:40दिन
चंद्र08:4009:32दिन
शनि09:3210:24दिन
गुरु10:2411:17दिन
मंगल11:1712:09दिन
सूर्य12:0913:02दिन
शुक्र13:0213:54दिन
बुध13:5414:46दिन
चंद्र14:4615:39दिन
शनि15:3916:31दिन
गुरु16:3117:23दिन
मंगल17:2318:31रात
सूर्य18:3119:39रात
शुक्र19:3920:46रात
बुध20:4621:54रात
चंद्र21:5423:02रात
शनि23:0200:10रात
गुरु00:1001:17रात
मंगल01:1702:25रात
सूर्य02:2503:33रात
शुक्र03:3304:40रात
बुध04:4005:48रात
चंद्र05:4806:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 नव॰ 2001कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
4 दिस॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 दिस॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 दिस॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 दिस॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 दिस॰ 2001मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 दिस॰ 2001धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 दिस॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 दिस॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8838° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।