16 फ़रवरी 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 16 फ़रवरी 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (23:02 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (12:17 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 09:47 से 11:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 18:11
रात 06:58 तक
तिथि
चतुर्थी, 23:02 तक
पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 12:17 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 फ़रवरी 2002 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 23:02 तक
शुक्ल पंचमी 01:25, 18 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 15:11, 17 फ़र॰ तक
योग
साध्य 18:07 तक
शुभ 18:53, 17 फ़र॰ तक
करण
वणिज 09:46 तक
विष्टि (भद्रा) 23:02 तक
बव 12:15, 17 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
09:20
चंद्रास्त
21:41
दिनमान
11h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
09:47 – 11:11
यमगंड
13:59 – 15:23
गुलिक काल
06:59 – 08:23

16 फ़रवरी 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:59 – 08:23टालें
शुभ08:23 – 09:47शुभ
रोग09:47 – 11:11टालें
उद्वेग11:11 – 12:35टालें
चर12:35 – 13:59सामान्य
लाभ13:59 – 15:23शुभ
अमृत15:23 – 16:47शुभ
काल16:47 – 18:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:11 – 19:47शुभ
उद्वेग19:47 – 21:23टालें
शुभ21:23 – 22:59शुभ
अमृत22:59 – 00:35शुभ
चर00:35 – 02:10सामान्य
रोग02:10 – 03:46टालें
काल03:46 – 05:22टालें
लाभ05:22 – 06:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5907:55दिन
गुरु07:5508:51दिन
मंगल08:5109:47दिन
सूर्य09:4710:43दिन
शुक्र10:4311:39दिन
बुध11:3912:35दिन
चंद्र12:3513:31दिन
शनि13:3114:27दिन
गुरु14:2715:23दिन
मंगल15:2316:19दिन
सूर्य16:1917:15दिन
शुक्र17:1518:11दिन
बुध18:1119:15रात
चंद्र19:1520:19रात
शनि20:1921:23रात
गुरु21:2322:27रात
मंगल22:2723:31रात
सूर्य23:3100:35रात
शुक्र00:3501:38रात
बुध01:3802:42रात
चंद्र02:4203:46रात
शनि03:4604:50रात
गुरु04:5005:54रात
मंगल05:5406:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 फ़र॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 फ़र॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 फ़र॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2002माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 मार्च 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 मार्च 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मार्च 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मार्च 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मार्च 2002फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2002मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8868° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।