6 सितंबर 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 6 सितंबर 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 6 सितंबर 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (12:11 तक), नक्षत्र मघा (21:20 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:37
रात 06:01 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:11 तक
अमावस्या
नक्षत्र
मघा, 21:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2002 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:11 तक
अमावस्या 08:40, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 21:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी 18:31, 7 सित॰ तक
योग
शिव 11:19 तक
सिद्ध 07:19, 7 सित॰ तक
करण
शकुनि 12:11 तक
चतुष्पद 22:28 तक
नाग 08:40, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
04:47
चंद्रास्त
18:26
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:19
यमगंड
15:28 – 17:02
गुलिक काल
07:35 – 09:10

6 सितंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:01 – 07:35सामान्य
लाभ07:35 – 09:10शुभ
अमृत09:10 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:19टालें
शुभ12:19 – 13:53शुभ
रोग13:53 – 15:28टालें
उद्वेग15:28 – 17:02टालें
चर17:02 – 18:37सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:37 – 20:02टालें
काल20:02 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 22:54शुभ
उद्वेग22:54 – 00:19टालें
शुभ00:19 – 01:45शुभ
अमृत01:45 – 03:10शुभ
चर03:10 – 04:36सामान्य
रोग04:36 – 06:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0107:04दिन
बुध07:0408:07दिन
चंद्र08:0709:10दिन
शनि09:1010:13दिन
गुरु10:1311:16दिन
मंगल11:1612:19दिन
सूर्य12:1913:22दिन
शुक्र13:2214:25दिन
बुध14:2515:28दिन
चंद्र15:2816:31दिन
शनि16:3117:34दिन
गुरु17:3418:37दिन
मंगल18:3719:34रात
सूर्य19:3420:31रात
शुक्र20:3121:28रात
बुध21:2822:25रात
चंद्र22:2523:22रात
शनि23:2200:19रात
गुरु00:1901:16रात
मंगल01:1602:13रात
सूर्य02:1303:10रात
शुक्र03:1004:07रात
बुध04:0705:04रात
चंद्र05:0406:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2002भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
10 सित॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 सित॰ 2002कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 सित॰ 2002भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
25 सित॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 सित॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 अक्टू॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 अक्टू॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8945° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।