17 नवंबर 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 17 नवंबर 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 17 नवंबर 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (02:36, 18 नव॰ तक), नक्षत्र रेवती (11:32 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 16:06 से 17:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 17:26
रात 06:45 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:36 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रेवती, 11:32 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2002 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 02:36, 18 नव॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 04:57, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 11:32 तक
अश्विनी 14:27, 18 नव॰ तक
योग
सिद्धि 16:13 तक
व्यतीपातअशुभ 17:01, 18 नव॰ तक
करण
कौलव 13:20 तक
तैतिल 02:36, 18 नव॰ तक
गर 15:48, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 11:32 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
16:03
चंद्रास्त
04:07
दिनमान
10h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
16:06 – 17:26
यमगंड
12:05 – 13:26
गुलिक काल
14:46 – 16:06

17 नवंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:44 – 08:05टालें
चर08:05 – 09:25सामान्य
लाभ09:25 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:05शुभ
काल12:05 – 13:26टालें
शुभ13:26 – 14:46शुभ
रोग14:46 – 16:06टालें
उद्वेग16:06 – 17:26टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:26 – 19:06शुभ
अमृत19:06 – 20:46शुभ
चर20:46 – 22:26सामान्य
रोग22:26 – 00:06टालें
काल00:06 – 01:46टालें
लाभ01:46 – 03:26शुभ
उद्वेग03:26 – 05:05टालें
शुभ05:05 – 06:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4407:38दिन
शुक्र07:3808:31दिन
बुध08:3109:25दिन
चंद्र09:2510:18दिन
शनि10:1811:12दिन
गुरु11:1212:05दिन
मंगल12:0512:59दिन
सूर्य12:5913:52दिन
शुक्र13:5214:46दिन
बुध14:4615:39दिन
चंद्र15:3916:33दिन
शनि16:3317:26दिन
गुरु17:2618:33रात
मंगल18:3319:40रात
सूर्य19:4020:46रात
शुक्र20:4621:53रात
बुध21:5322:59रात
चंद्र22:5900:06रात
शनि00:0601:12रात
गुरु01:1202:19रात
मंगल02:1903:26रात
सूर्य03:2604:32रात
शुक्र04:3205:39रात
बुध05:3906:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 नव॰ 2002कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
24 नव॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 नव॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
7 दिस॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2002धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8972° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।