17 फ़रवरी 2003 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 17 फ़रवरी 2003, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 17 फ़रवरी 2003 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (02:46, 18 फ़र॰ तक), नक्षत्र मघा (20:53 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:58 पर और सूर्यास्त 18:12 पर है। राहुकाल 08:22 से 09:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:58 – 18:12
रात 06:57 तक
तिथि
प्रतिपदा, 02:46 तक
द्वितीया
नक्षत्र
मघा, 20:53 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 फ़रवरी 2003 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 02:46, 18 फ़र॰ तक
कृष्ण द्वितीया 23:57, 18 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 20:53 तक
पूर्वा फाल्गुनी 18:50, 18 फ़र॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:00, 18 फ़र॰ तक
सुकर्मा 20:31, 18 फ़र॰ तक
करण
बालव 16:06 तक
कौलव 02:46, 18 फ़र॰ तक
तैतिल 13:22, 18 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:58
सूर्यास्त
18:12
चंद्रोदय
18:40
चंद्रास्त
07:23
दिनमान
11h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:22 – 09:46
यमगंड
11:11 – 12:35
गुलिक काल
13:59 – 15:23

17 फ़रवरी 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:58 – 08:22शुभ
काल08:22 – 09:46टालें
शुभ09:46 – 11:11शुभ
रोग11:11 – 12:35टालें
उद्वेग12:35 – 13:59टालें
चर13:59 – 15:23सामान्य
लाभ15:23 – 16:48शुभ
अमृत16:48 – 18:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:12 – 19:48सामान्य
रोग19:48 – 21:23टालें
काल21:23 – 22:59टालें
लाभ22:59 – 00:34शुभ
उद्वेग00:34 – 02:10टालें
शुभ02:10 – 03:46शुभ
अमृत03:46 – 05:21शुभ
चर05:21 – 06:57सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5807:54दिन
शनि07:5408:50दिन
गुरु08:5009:46दिन
मंगल09:4610:43दिन
सूर्य10:4311:39दिन
शुक्र11:3912:35दिन
बुध12:3513:31दिन
चंद्र13:3114:27दिन
शनि14:2715:23दिन
गुरु15:2316:20दिन
मंगल16:2017:16दिन
सूर्य17:1618:12दिन
शुक्र18:1219:16रात
बुध19:1620:19रात
चंद्र20:1921:23रात
शनि21:2322:27रात
गुरु22:2723:31रात
मंगल23:3100:34रात
सूर्य00:3401:38रात
शुक्र01:3802:42रात
बुध02:4203:46रात
चंद्र03:4604:49रात
शनि04:4905:53रात
गुरु05:5306:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 फ़र॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 फ़र॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 फ़र॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 फ़र॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 मार्च 2003फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
7 मार्च 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 मार्च 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 मार्च 2003मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 मार्च 2003फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9007° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।