28 दिसंबर 2003 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 28 दिसंबर 2003, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 28 दिसंबर 2003 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (02:25, 29 दिस॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (17:36 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 16:14 से 17:32 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 17:32
रात 07:12 तक
तिथि
षष्ठी, 02:25 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा, 17:36 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 दिसंबर 2003 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 02:25, 29 दिस॰ तक
शुक्ल सप्तमी 02:58, 30 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 17:36 तक
पूर्वा भाद्रपद 18:24, 29 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 19:09 तक
व्यतीपातअशुभ 18:09, 29 दिस॰ तक
करण
कौलव 14:29 तक
तैतिल 02:25, 29 दिस॰ तक
गर 14:35, 29 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
11:18
चंद्रास्त
22:51
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:17
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
16:14 – 17:32
यमगंड
12:22 – 13:39
गुलिक काल
14:57 – 16:14

28 दिसंबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:12 – 08:29टालें
चर08:29 – 09:47सामान्य
लाभ09:47 – 11:04शुभ
अमृत11:04 – 12:22शुभ
काल12:22 – 13:39टालें
शुभ13:39 – 14:57शुभ
रोग14:57 – 16:14टालें
उद्वेग16:14 – 17:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:32 – 19:15शुभ
अमृत19:15 – 20:57शुभ
चर20:57 – 22:40सामान्य
रोग22:40 – 00:22टालें
काल00:22 – 02:05टालें
लाभ02:05 – 03:47शुभ
उद्वेग03:47 – 05:30टालें
शुभ05:30 – 07:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1208:04दिन
शुक्र08:0408:55दिन
बुध08:5509:47दिन
चंद्र09:4710:39दिन
शनि10:3911:30दिन
गुरु11:3012:22दिन
मंगल12:2213:14दिन
सूर्य13:1414:05दिन
शुक्र14:0514:57दिन
बुध14:5715:49दिन
चंद्र15:4916:40दिन
शनि16:4017:32दिन
गुरु17:3218:40रात
मंगल18:4019:49रात
सूर्य19:4920:57रात
शुक्र20:5722:05रात
बुध22:0523:14रात
चंद्र23:1400:22रात
शनि00:2201:30रात
गुरु01:3002:39रात
मंगल02:3903:47रात
सूर्य03:4704:56रात
शुक्र04:5606:04रात
बुध06:0407:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जन॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जन॰ 2004पौष पूर्णिमापूर्णिमा
11 जन॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2004मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 जन॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जन॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2004माघ अमावस्याअमावस्या
25 जन॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9128° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।