31 दिसंबर 2003 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 31 दिसंबर 2003, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 दिसंबर 2003 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (06:21, 1 जन॰ तक), नक्षत्र रेवती (22:19 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 12:23 से 13:41 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:34
रात 07:13 तक
तिथि
नवमी, 06:21 तक
दशमी
नक्षत्र
रेवती, 22:19 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2003 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 06:21, 1 जन॰ तक
शुक्ल दशमी 08:52, 2 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 22:19 तक
अश्विनी 01:08, 2 जन॰ तक
योग
परिघअशुभ 18:01 तक
शिव 18:39, 1 जन॰ तक
करण
बालव 17:16 तक
कौलव 06:21, 1 जन॰ तक
तैतिल 19:34, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 22:19 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
12:47
चंद्रास्त
00:43
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:23 – 13:41
यमगंड
08:31 – 09:48
गुलिक काल
11:06 – 12:23

31 दिसंबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:13 – 08:31शुभ
अमृत08:31 – 09:48शुभ
काल09:48 – 11:06टालें
शुभ11:06 – 12:23शुभ
रोग12:23 – 13:41टालें
उद्वेग13:41 – 14:59टालें
चर14:59 – 16:16सामान्य
लाभ16:16 – 17:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:34 – 19:16टालें
शुभ19:16 – 20:59शुभ
अमृत20:59 – 22:41शुभ
चर22:41 – 00:24सामान्य
रोग00:24 – 02:06टालें
काल02:06 – 03:48टालें
लाभ03:48 – 05:31शुभ
उद्वेग05:31 – 07:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:1308:05दिन
चंद्र08:0508:56दिन
शनि08:5609:48दिन
गुरु09:4810:40दिन
मंगल10:4011:32दिन
सूर्य11:3212:23दिन
शुक्र12:2313:15दिन
बुध13:1514:07दिन
चंद्र14:0714:59दिन
शनि14:5915:50दिन
गुरु15:5016:42दिन
मंगल16:4217:34दिन
सूर्य17:3418:42रात
शुक्र18:4219:50रात
बुध19:5020:59रात
चंद्र20:5922:07रात
शनि22:0723:15रात
गुरु23:1500:24रात
मंगल00:2401:32रात
सूर्य01:3202:40रात
शुक्र02:4003:48रात
बुध03:4804:57रात
चंद्र04:5706:05रात
शनि06:0507:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जन॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जन॰ 2004पौष पूर्णिमापूर्णिमा
11 जन॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2004मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 जन॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जन॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2004माघ अमावस्याअमावस्या
25 जन॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9129° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।