20 अगस्त 2005 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 20 अगस्त 2005, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 20 अगस्त 2005 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (19:39 तक), नक्षत्र शतभिषा (02:29, 21 अग॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 09:08 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 18:55
रात 05:53 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:39 तक
द्वितीया
नक्षत्र
शतभिषा, 02:29 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अगस्त 2005 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 19:39 तक
कृष्ण द्वितीया 16:14, 21 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 02:29, 21 अग॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 00:02, 22 अग॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 20:30 तक
सुकर्मा 16:37, 21 अग॰ तक
करण
बालव 09:29 तक
कौलव 19:39 तक
तैतिल 05:53, 21 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
19:38
चंद्रास्त
06:12
दिनमान
13h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
09:08 – 10:46
यमगंड
14:02 – 15:40
गुलिक काल
05:52 – 07:30

20 अगस्त 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:52 – 07:30टालें
शुभ07:30 – 09:08शुभ
रोग09:08 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 12:24टालें
चर12:24 – 14:02सामान्य
लाभ14:02 – 15:40शुभ
अमृत15:40 – 17:17शुभ
काल17:17 – 18:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:55 – 20:17शुभ
उद्वेग20:17 – 21:40टालें
शुभ21:40 – 23:02शुभ
अमृत23:02 – 00:24शुभ
चर00:24 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:09टालें
काल03:09 – 04:31टालें
लाभ04:31 – 05:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5206:58दिन
गुरु06:5808:03दिन
मंगल08:0309:08दिन
सूर्य09:0810:13दिन
शुक्र10:1311:19दिन
बुध11:1912:24दिन
चंद्र12:2413:29दिन
शनि13:2914:34दिन
गुरु14:3415:40दिन
मंगल15:4016:45दिन
सूर्य16:4517:50दिन
शुक्र17:5018:55दिन
बुध18:5519:50रात
चंद्र19:5020:45रात
शनि20:4521:40रात
गुरु21:4022:34रात
मंगल22:3423:29रात
सूर्य23:2900:24रात
शुक्र00:2401:19रात
बुध01:1902:14रात
चंद्र02:1403:09रात
शनि03:0904:03रात
गुरु04:0304:58रात
मंगल04:5805:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अग॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 अग॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 अग॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 सित॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 सित॰ 2005भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
7 सित॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 सित॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 सित॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 सित॰ 2005कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2005भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9357° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।