17 सितंबर 2005 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 17 सितंबर 2005, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 17 सितंबर 2005 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (10:48 तक), नक्षत्र शतभिषा (13:14 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:23 पर है। राहुकाल 09:11 से 10:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:23
रात 06:07 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:48 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
शतभिषा, 13:14 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 सितंबर 2005 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:48 तक
पूर्णिमा 07:30, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:14 तक
पूर्वा भाद्रपद 10:46, 18 सित॰ तक
योग
धृति 07:20 तक
शूलअशुभ 03:28, 18 सित॰ तक
गंडअशुभ 23:50, 18 सित॰ तक
करण
वणिज 10:48 तक
विष्टि (भद्रा) 21:08 तक
बव 07:30, 18 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:21, 18 सित॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:23
चंद्रोदय
18:07
चंद्रास्त
04:58
दिनमान
12h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
09:11 – 10:43
यमगंड
13:47 – 15:19
गुलिक काल
06:06 – 07:39

17 सितंबर 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:06 – 07:39टालें
शुभ07:39 – 09:11शुभ
रोग09:11 – 10:43टालें
उद्वेग10:43 – 12:15टालें
चर12:15 – 13:47सामान्य
लाभ13:47 – 15:19शुभ
अमृत15:19 – 16:51शुभ
काल16:51 – 18:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:23 – 19:51शुभ
उद्वेग19:51 – 21:19टालें
शुभ21:19 – 22:47शुभ
अमृत22:47 – 00:15शुभ
चर00:15 – 01:43सामान्य
रोग01:43 – 03:11टालें
काल03:11 – 04:39टालें
लाभ04:39 – 06:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0607:08दिन
गुरु07:0808:09दिन
मंगल08:0909:11दिन
सूर्य09:1110:12दिन
शुक्र10:1211:14दिन
बुध11:1412:15दिन
चंद्र12:1513:16दिन
शनि13:1614:18दिन
गुरु14:1815:19दिन
मंगल15:1916:21दिन
सूर्य16:2117:22दिन
शुक्र17:2218:23दिन
बुध18:2319:22रात
चंद्र19:2220:21रात
शनि20:2121:19रात
गुरु21:1922:18रात
मंगल22:1823:17रात
सूर्य23:1700:15रात
शुक्र00:1501:14रात
बुध01:1402:12रात
चंद्र02:1203:11रात
शनि03:1104:10रात
गुरु04:1005:08रात
मंगल05:0806:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 सित॰ 2005भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
21 सित॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 सित॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 सित॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 अक्टू॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2005आश्विन अमावस्याअमावस्या
7 अक्टू॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 अक्टू॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 अक्टू॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9368° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।