16 अक्टूबर 2005 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 16 अक्टूबर 2005, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 16 अक्टूबर 2005 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (20:00 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (18:47 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 16:24 से 17:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:50
रात 06:23 तक
तिथि
चतुर्दशी, 20:00 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 18:47 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2005 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 20:00 तक
पूर्णिमा 17:43, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 17:14, 17 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 09:25 तक
व्याघातअशुभ 06:17, 17 अक्टू॰ तक
हर्षण 03:25, 18 अक्टू॰ तक
करण
गर 09:15 तक
वणिज 20:00 तक
विष्टि (भद्रा) 06:49, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
17:09
चंद्रास्त
04:51
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
16:24 – 17:50
यमगंड
12:06 – 13:32
गुलिक काल
14:58 – 16:24

16 अक्टूबर 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:22 – 07:48टालें
चर07:48 – 09:14सामान्य
लाभ09:14 – 10:40शुभ
अमृत10:40 – 12:06शुभ
काल12:06 – 13:32टालें
शुभ13:32 – 14:58शुभ
रोग14:58 – 16:24टालें
उद्वेग16:24 – 17:50टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:50 – 19:24शुभ
अमृत19:24 – 20:58शुभ
चर20:58 – 22:32सामान्य
रोग22:32 – 00:06टालें
काल00:06 – 01:40टालें
लाभ01:40 – 03:14शुभ
उद्वेग03:14 – 04:49टालें
शुभ04:49 – 06:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2207:19दिन
शुक्र07:1908:17दिन
बुध08:1709:14दिन
चंद्र09:1410:11दिन
शनि10:1111:09दिन
गुरु11:0912:06दिन
मंगल12:0613:03दिन
सूर्य13:0314:01दिन
शुक्र14:0114:58दिन
बुध14:5815:55दिन
चंद्र15:5516:53दिन
शनि16:5317:50दिन
गुरु17:5018:53रात
मंगल18:5319:56रात
सूर्य19:5620:58रात
शुक्र20:5822:01रात
बुध22:0123:04रात
चंद्र23:0400:06रात
शनि00:0601:09रात
गुरु01:0902:12रात
मंगल02:1203:14रात
सूर्य03:1404:17रात
शुक्र04:1705:20रात
बुध05:2006:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2005आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2005तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अक्टू॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अक्टू॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 नव॰ 2005कार्तिक अमावस्याअमावस्या
5 नव॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 नव॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 नव॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9379° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।