6 दिसंबर 2005 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 6 दिसंबर 2005, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 6 दिसंबर 2005 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (08:32 तक), नक्षत्र श्रवण (13:51 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 14:48 से 16:06 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 17:24
रात 07:00 तक
तिथि
षष्ठी, 06:11 तक
नक्षत्र
श्रवण, 13:51 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 दिसंबर 2005 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 08:32 तक
शुक्ल षष्ठी 06:11, 7 दिस॰ तक
शुक्ल सप्तमी 04:04, 8 दिस॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:51 तक
धनिष्ठा 12:15, 7 दिस॰ तक
योग
ध्रुव 08:04 तक
व्याघातअशुभ 04:56, 7 दिस॰ तक
हर्षण 01:58, 8 दिस॰ तक
करण
बालव 08:32 तक
कौलव 19:20 तक
तैतिल 06:11, 7 दिस॰ तक
गर 17:05, 7 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मकर 01:02, 7 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
11:25
चंद्रास्त
22:22
दिनमान
10h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
14:48 – 16:06
यमगंड
09:36 – 10:54
गुलिक काल
12:12 – 13:30

6 दिसंबर 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:00 – 08:18टालें
उद्वेग08:18 – 09:36टालें
चर09:36 – 10:54सामान्य
लाभ10:54 – 12:12शुभ
अमृत12:12 – 13:30शुभ
काल13:30 – 14:48टालें
शुभ14:48 – 16:06शुभ
रोग16:06 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:24 – 19:06टालें
लाभ19:06 – 20:48शुभ
उद्वेग20:48 – 22:30टालें
शुभ22:30 – 00:12शुभ
अमृत00:12 – 01:54शुभ
चर01:54 – 03:36सामान्य
रोग03:36 – 05:18टालें
काल05:18 – 07:00टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0007:52दिन
सूर्य07:5208:44दिन
शुक्र08:4409:36दिन
बुध09:3610:28दिन
चंद्र10:2811:20दिन
शनि11:2012:12दिन
गुरु12:1213:04दिन
मंगल13:0413:56दिन
सूर्य13:5614:48दिन
शुक्र14:4815:40दिन
बुध15:4016:32दिन
चंद्र16:3217:24दिन
शनि17:2418:32रात
गुरु18:3219:40रात
मंगल19:4020:48रात
सूर्य20:4821:56रात
शुक्र21:5623:04रात
बुध23:0400:12रात
चंद्र00:1201:20रात
शनि01:2002:28रात
गुरु02:2803:36रात
मंगल03:3604:44रात
सूर्य04:4405:52रात
शुक्र05:5207:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 दिस॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 दिस॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 दिस॰ 2005मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2005धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिस॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 दिस॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 दिस॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 दिस॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 दिस॰ 2005पौष अमावस्याअमावस्या
3 जन॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9399° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।