18 दिसंबर 2005 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 18 दिसंबर 2005, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 18 दिसंबर 2005 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (01:47, 19 दिस॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (14:24 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 16:10 से 17:27 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:27
रात 07:08 तक
तिथि
तृतीया, 01:47 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 14:24 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2005 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:47, 19 दिस॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 04:03, 20 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 16:56, 19 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 09:40 तक
इंद्र 10:04, 19 दिस॰ तक
करण
वणिज 12:48 तक
विष्टि (भद्रा) 01:47, 19 दिस॰ तक
बव 14:52, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 07:50 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
19:47
चंद्रास्त
09:25
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
16:10 – 17:27
यमगंड
12:17 – 13:35
गुलिक काल
14:52 – 16:10

18 दिसंबर 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:07 – 08:25टालें
चर08:25 – 09:42सामान्य
लाभ09:42 – 11:00शुभ
अमृत11:00 – 12:17शुभ
काल12:17 – 13:35टालें
शुभ13:35 – 14:52शुभ
रोग14:52 – 16:10टालें
उद्वेग16:10 – 17:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:27 – 19:10शुभ
अमृत19:10 – 20:52शुभ
चर20:52 – 22:35सामान्य
रोग22:35 – 00:17टालें
काल00:17 – 02:00टालें
लाभ02:00 – 03:43शुभ
उद्वेग03:43 – 05:25टालें
शुभ05:25 – 07:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0707:59दिन
शुक्र07:5908:51दिन
बुध08:5109:42दिन
चंद्र09:4210:34दिन
शनि10:3411:26दिन
गुरु11:2612:17दिन
मंगल12:1713:09दिन
सूर्य13:0914:00दिन
शुक्र14:0014:52दिन
बुध14:5215:44दिन
चंद्र15:4416:35दिन
शनि16:3517:27दिन
गुरु17:2718:35रात
मंगल18:3519:44रात
सूर्य19:4420:52रात
शुक्र20:5222:01रात
बुध22:0123:09रात
चंद्र23:0900:17रात
शनि00:1701:26रात
गुरु01:2602:34रात
मंगल02:3403:43रात
सूर्य03:4304:51रात
शुक्र04:5106:00रात
बुध06:0007:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 दिस॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 दिस॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 दिस॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 दिस॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 दिस॰ 2005पौष अमावस्याअमावस्या
3 जन॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2006शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2006प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2006पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2006मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9403° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।