5 अगस्त 2006 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 5 अगस्त 2006, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 अगस्त 2006 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (02:37, 6 अग॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (00:14, 6 अग॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 19:09 पर है। राहुकाल 09:05 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 19:09
रात 05:45 तक
तिथि
एकादशी, 02:37 तक
द्वादशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 00:14 तक
मूल
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अगस्त 2006 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 02:37, 6 अग॰ तक
शुक्ल द्वादशी 00:54, 7 अग॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:14, 6 अग॰ तक
मूल 23:21, 6 अग॰ तक
योग
इंद्र 19:57 तक
वैधृतिअशुभ 17:43, 6 अग॰ तक
करण
वणिज 15:11 तक
विष्टि (भद्रा) 02:37, 6 अग॰ तक
बव 13:51, 6 अग॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 00:14, 6 अग॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
19:09
चंद्रोदय
15:45
चंद्रास्त
00:57
दिनमान
13h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
09:05 – 10:46
यमगंड
14:07 – 15:48
गुलिक काल
05:44 – 07:25

5 अगस्त 2006 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:44 – 07:25टालें
शुभ07:25 – 09:05शुभ
रोग09:05 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 12:27टालें
चर12:27 – 14:07सामान्य
लाभ14:07 – 15:48शुभ
अमृत15:48 – 17:28शुभ
काल17:28 – 19:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:09 – 20:28शुभ
उद्वेग20:28 – 21:48टालें
शुभ21:48 – 23:07शुभ
अमृत23:07 – 00:27शुभ
चर00:27 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:06टालें
काल03:06 – 04:25टालें
लाभ04:25 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4406:51दिन
गुरु06:5107:58दिन
मंगल07:5809:05दिन
सूर्य09:0510:12दिन
शुक्र10:1211:19दिन
बुध11:1912:27दिन
चंद्र12:2713:34दिन
शनि13:3414:41दिन
गुरु14:4115:48दिन
मंगल15:4816:55दिन
सूर्य16:5518:02दिन
शुक्र18:0219:09दिन
बुध19:0920:02रात
चंद्र20:0220:55रात
शनि20:5521:48रात
गुरु21:4822:41रात
मंगल22:4123:34रात
सूर्य23:3400:27रात
शुक्र00:2701:20रात
बुध01:2002:13रात
चंद्र02:1303:06रात
शनि03:0603:59रात
गुरु03:5904:52रात
मंगल04:5205:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अग॰ 2006शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2006प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2006श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
12 अग॰ 2006संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2006कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2006सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2006कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2006प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2006भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
28 अग॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9491° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।