13 दिसंबर 2006 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 13 दिसंबर 2006, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 13 दिसंबर 2006 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (09:22 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (23:33 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 07:04 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 12:15 से 13:32 तक है।

दिन और रात
दिन 07:04 – 17:25
रात 07:05 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 23:33 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 दिसंबर 2006 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 09:22 तक
कृष्ण नवमी 12:06, 14 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 02:38, 15 दिस॰ तक
योग
आयुष्मान 03:59, 14 दिस॰ तक
सौभाग्य 04:55, 15 दिस॰ तक
करण
कौलव 09:22 तक
तैतिल 22:44 तक
गर 12:06, 14 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:04
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
00:22
चंद्रास्त
12:47
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:15 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:35 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:15 – 13:32
यमगंड
08:22 – 09:39
गुलिक काल
10:57 – 12:15

13 दिसंबर 2006 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:04 – 08:22शुभ
अमृत08:22 – 09:39शुभ
काल09:39 – 10:57टालें
शुभ10:57 – 12:15शुभ
रोग12:15 – 13:32टालें
उद्वेग13:32 – 14:50टालें
चर14:50 – 16:07सामान्य
लाभ16:07 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 19:08टालें
शुभ19:08 – 20:50शुभ
अमृत20:50 – 22:32शुभ
चर22:32 – 00:15सामान्य
रोग00:15 – 01:57टालें
काल01:57 – 03:40टालें
लाभ03:40 – 05:22शुभ
उद्वेग05:22 – 07:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0407:56दिन
चंद्र07:5608:48दिन
शनि08:4809:39दिन
गुरु09:3910:31दिन
मंगल10:3111:23दिन
सूर्य11:2312:15दिन
शुक्र12:1513:06दिन
बुध13:0613:58दिन
चंद्र13:5814:50दिन
शनि14:5015:42दिन
गुरु15:4216:33दिन
मंगल16:3317:25दिन
सूर्य17:2518:33रात
शुक्र18:3319:42रात
बुध19:4220:50रात
चंद्र20:5021:58रात
शनि21:5823:07रात
गुरु23:0700:15रात
मंगल00:1501:23रात
सूर्य01:2302:32रात
शुक्र02:3203:40रात
बुध03:4004:48रात
चंद्र04:4805:57रात
शनि05:5707:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2006कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2006धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2006प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 दिस॰ 2006पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2006शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2007पौष पूर्णिमापूर्णिमा
7 जन॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9541° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।