22 जनवरी 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 22 जनवरी 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 जनवरी 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (00:16, 23 जन॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (13:34 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 08:33 से 09:53 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:51
रात 07:13 तक
तिथि
चतुर्थी, 00:16 तक
पंचमी
नक्षत्र
शतभिषा, 13:34 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2007 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 00:16, 23 जन॰ तक
शुक्ल पंचमी 21:51, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:34 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:50, 23 जन॰ तक
योग
वरीयान 16:45 तक
परिघअशुभ 13:33, 23 जन॰ तक
करण
वणिज 13:29 तक
विष्टि (भद्रा) 00:16, 23 जन॰ तक
बव 11:03, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:15, 23 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
09:26
चंद्रास्त
21:22
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:33 – 09:53
यमगंड
11:12 – 12:32
गुलिक काल
13:52 – 15:12

22 जनवरी 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:13 – 08:33शुभ
काल08:33 – 09:53टालें
शुभ09:53 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:32टालें
उद्वेग12:32 – 13:52टालें
चर13:52 – 15:12सामान्य
लाभ15:12 – 16:31शुभ
अमृत16:31 – 17:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:51 – 19:31सामान्य
रोग19:31 – 21:12टालें
काल21:12 – 22:52टालें
लाभ22:52 – 00:32शुभ
उद्वेग00:32 – 02:12टालें
शुभ02:12 – 03:53शुभ
अमृत03:53 – 05:33शुभ
चर05:33 – 07:13सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1308:06दिन
शनि08:0609:00दिन
गुरु09:0009:53दिन
मंगल09:5310:46दिन
सूर्य10:4611:39दिन
शुक्र11:3912:32दिन
बुध12:3213:25दिन
चंद्र13:2514:19दिन
शनि14:1915:12दिन
गुरु15:1216:05दिन
मंगल16:0516:58दिन
सूर्य16:5817:51दिन
शुक्र17:5118:58रात
बुध18:5820:05रात
चंद्र20:0521:12रात
शनि21:1222:18रात
गुरु22:1823:25रात
मंगल23:2500:32रात
सूर्य00:3201:39रात
शुक्र01:3902:46रात
बुध02:4603:53रात
चंद्र03:5304:59रात
शनि04:5906:06रात
गुरु06:0607:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2007माघ पूर्णिमापूर्णिमा
6 फ़र॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2007कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2007फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9556° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।