18 मार्च 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 18 मार्च 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 18 मार्च 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (11:43 तक), नक्षत्र शतभिषा (09:37 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 18:30 पर है। राहुकाल 17:00 से 18:30 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 18:30
रात 06:27 तक
तिथि
चतुर्दशी, 11:43 तक
अमावस्या
नक्षत्र
शतभिषा, 09:37 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 मार्च 2007 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 11:43 तक
अमावस्या 08:12, 19 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:37 तक
पूर्वा भाद्रपद 06:53, 19 मार्च तक
योग
साध्य 09:47 तक
शुभ 05:44, 19 मार्च तक
शुक्ल 01:33, 20 मार्च तक
करण
शकुनि 11:43 तक
चतुष्पद 21:59 तक
नाग 08:12, 19 मार्च तक
चंद्र राशि
कुंभ 01:36, 19 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
18:30
चंद्रोदय
05:50
चंद्रास्त
17:48
दिनमान
12h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
17:00 – 18:30
यमगंड
12:29 – 13:59
गुलिक काल
15:30 – 17:00

18 मार्च 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:28 – 07:58टालें
चर07:58 – 09:28सामान्य
लाभ09:28 – 10:59शुभ
अमृत10:59 – 12:29शुभ
काल12:29 – 13:59टालें
शुभ13:59 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 17:00टालें
उद्वेग17:00 – 18:30टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:30 – 20:00शुभ
अमृत20:00 – 21:30शुभ
चर21:30 – 22:59सामान्य
रोग22:59 – 00:29टालें
काल00:29 – 01:58टालें
लाभ01:58 – 03:28शुभ
उद्वेग03:28 – 04:57टालें
शुभ04:57 – 06:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2807:28दिन
शुक्र07:2808:28दिन
बुध08:2809:28दिन
चंद्र09:2810:29दिन
शनि10:2911:29दिन
गुरु11:2912:29दिन
मंगल12:2913:29दिन
सूर्य13:2914:30दिन
शुक्र14:3015:30दिन
बुध15:3016:30दिन
चंद्र16:3017:30दिन
शनि17:3018:30दिन
गुरु18:3019:30रात
मंगल19:3020:30रात
सूर्य20:3021:30रात
शुक्र21:3022:29रात
बुध22:2923:29रात
चंद्र23:2900:29रात
शनि00:2901:28रात
गुरु01:2802:28रात
मंगल02:2803:28रात
सूर्य03:2804:27रात
शुक्र04:2705:27रात
बुध05:2706:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 मार्च 2007चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2007चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
7 अप्रैल 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अप्रैल 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अप्रैल 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2007मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9577° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।