30 जुलाई 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 30 जुलाई 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 30 जुलाई 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (06:17 तक), नक्षत्र श्रवण (01:12, 31 जुल॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 19:13 पर है। राहुकाल 07:22 से 09:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 19:13
रात 05:41 तक
तिथि
प्रतिपदा, 04:53 तक
नक्षत्र
श्रवण, 01:12 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जुलाई 2007 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 06:17 तक
कृष्ण प्रतिपदा 04:53, 31 जुल॰ तक
कृष्ण द्वितीया 03:07, 1 अग॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 01:12, 31 जुल॰ तक
धनिष्ठा 00:15, 1 अग॰ तक
योग
प्रीति 08:52 तक
आयुष्मान 06:39, 31 जुल॰ तक
करण
बव 06:17 तक
बालव 17:38 तक
कौलव 04:53, 31 जुल॰ तक
तैतिल 16:02, 31 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
19:13
चंद्रोदय
19:41
चंद्रास्त
05:39
दिनमान
13h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
07:22 – 09:04
यमगंड
10:45 – 12:27
गुलिक काल
14:09 – 15:50

30 जुलाई 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:41 – 07:22शुभ
काल07:22 – 09:04टालें
शुभ09:04 – 10:45शुभ
रोग10:45 – 12:27टालें
उद्वेग12:27 – 14:09टालें
चर14:09 – 15:50सामान्य
लाभ15:50 – 17:32शुभ
अमृत17:32 – 19:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:13 – 20:32सामान्य
रोग20:32 – 21:50टालें
काल21:50 – 23:09टालें
लाभ23:09 – 00:27शुभ
उद्वेग00:27 – 01:46टालें
शुभ01:46 – 03:04शुभ
अमृत03:04 – 04:23शुभ
चर04:23 – 05:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4106:48दिन
शनि06:4807:56दिन
गुरु07:5609:04दिन
मंगल09:0410:12दिन
सूर्य10:1211:19दिन
शुक्र11:1912:27दिन
बुध12:2713:35दिन
चंद्र13:3514:42दिन
शनि14:4215:50दिन
गुरु15:5016:58दिन
मंगल16:5818:06दिन
सूर्य18:0619:13दिन
शुक्र19:1320:06रात
बुध20:0620:58रात
चंद्र20:5821:50रात
शनि21:5022:43रात
गुरु22:4323:35रात
मंगल23:3500:27रात
सूर्य00:2701:20रात
शुक्र01:2002:12रात
बुध02:1203:04रात
चंद्र03:0403:57रात
शनि03:5704:49रात
गुरु04:4905:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 जुल॰ 2007आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2007श्रावण अमावस्याअमावस्या
17 अग॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2007सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अग॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2007श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9629° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।