20 जनवरी 2008 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 20 जनवरी 2008, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 जनवरी 2008 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (23:37 तक), नक्षत्र मृगशिरा (14:38 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:49 पर है। राहुकाल 16:30 से 17:49 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:49
रात 07:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 23:37 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 14:38 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2008 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 23:37 तक
शुक्ल चतुर्दशी 21:11, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 12:48, 21 जन॰ तक
योग
इंद्र 21:17 तक
वैधृतिअशुभ 18:02, 21 जन॰ तक
करण
कौलव 12:55 तक
तैतिल 23:37 तक
गर 10:22, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:49
चंद्रोदय
15:23
चंद्रास्त
05:09
दिनमान
10h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
16:30 – 17:49
यमगंड
12:32 – 13:51
गुलिक काल
15:10 – 16:30

20 जनवरी 2008 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:14 – 08:33टालें
चर08:33 – 09:53सामान्य
लाभ09:53 – 11:12शुभ
अमृत11:12 – 12:32शुभ
काल12:32 – 13:51टालें
शुभ13:51 – 15:10शुभ
रोग15:10 – 16:30टालें
उद्वेग16:30 – 17:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:49 – 19:30शुभ
अमृत19:30 – 21:10शुभ
चर21:10 – 22:51सामान्य
रोग22:51 – 00:31टालें
काल00:31 – 02:12टालें
लाभ02:12 – 03:53शुभ
उद्वेग03:53 – 05:33टालें
शुभ05:33 – 07:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1408:07दिन
शुक्र08:0709:00दिन
बुध09:0009:53दिन
चंद्र09:5310:46दिन
शनि10:4611:39दिन
गुरु11:3912:32दिन
मंगल12:3213:25दिन
सूर्य13:2514:18दिन
शुक्र14:1815:10दिन
बुध15:1016:03दिन
चंद्र16:0316:56दिन
शनि16:5617:49दिन
गुरु17:4918:56रात
मंगल18:5620:03रात
सूर्य20:0321:10रात
शुक्र21:1022:17रात
बुध22:1723:24रात
चंद्र23:2400:31रात
शनि00:3101:38रात
गुरु01:3802:46रात
मंगल02:4603:53रात
सूर्य03:5305:00रात
शुक्र05:0006:07रात
बुध06:0707:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 जन॰ 2008प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2008पौष पूर्णिमापूर्णिमा
26 जन॰ 2008संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 जन॰ 2008कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2008कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 फ़र॰ 2008प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 फ़र॰ 2008माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2008विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2008कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2008शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9695° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।